जम्मू‑कश्मीर पुलिस ने हिज़्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी इम्तियाज़ अहमद कांडू के खिलाफ इंटरपोलेशन रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। यह नोटिस 2013 के सोपोरे हमले में चार पुलिसकर्मियों की मौत से जुड़े कांडू को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरफ्तार करने का लक्ष्य रखता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • इंटरपोलेशन ने हिज़्बुल के कमांडर इम्तियाज़ कांडू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया
  • कांडू को 2013 के सोपोरे हमले में चार पुलिसकर्मी मारे जाने का आरोप
  • साथ ही कांडू को कम से कम दस और आतंकवादी मामलों में सजा का सामना करना पड़ सकता है

जम्मू‑कश्मीर के राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने शनिवार को बताया कि उन्होंने हिज़्बुल मुजाहिदीन (HM) के एक प्रमुख कमांडर इम्तियाज़ अहमद कांडू के खिलाफ इंटरपोलेशन रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन को कांडू को खोजने, हिरासत में लेने और भारत में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ करने के लिए प्रेरित करता है।

पृष्ठभूमि और 2013 का सोपोरे हमला

अप्रैल 2013 में कश्मीर के सोपोरे के हायगम क्षेत्र में हुई घातक ambush ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर दिया था। इस हमले में चार पुलिसकर्मी मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए। उस समय यह क्षेत्र में सुरक्षा बलों के खिलाफ सबसे घातक हमलों में से एक माना जाता था। केस को 2024 में SIA को स्थानांतरित किया गया, जहाँ विस्तृत जांच के बाद कांडू को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया।

कांडू का प्रोफ़ाइल और पिछले अभियोजन

कांडू 2010 से हिज़्बुल का कमांडर रहा है और 2022 में केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया गया। SIA ने 2024 में हायगम हमले की जांच पूरी कर एक चार्जशीट दायर की, जिसमें कांडू के साथ पाँच अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया। उनमें से तीन को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो को अभियोजन के दौरान मुठभेड़ों में मार दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संभावित परिणाम

इंटरपोलेशन का रेड कॉर्नर नोटिस अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे देश सीमाओं के पार अपराधियों को ट्रैक किया जा सकता है। SIA ने कहा कि यह कदम “अपराधियों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लाने और आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने” की दिशा में उनकी बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। यदि कांडू को पाकिस्तान में पकड़ा जाता है, तो भारत‑पाकिस्तान संबंधों पर भी प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया अक्सर कूटनीतिक जटिलताओं से घिरी होती है।

आगे की चुनौतियां

कांडू को कम से कम दस अन्य आतंकवादी मामलों में भी सजा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। फिर भी, आतंकवादियों की छिपने और भागने की रणनीतियों को देखते हुए, SIA को निरंतर निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसे घातक हमलों को रोका जा सके।