महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग ने फिल्म अभिनेत्री मौषमी चटर्जी को गोवा में आयोजित मेडिकल कॉलेज रीयूनियन में न आने के कारण ₹3 लाख का भुगतान वापस करने और अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया। यह निर्णय सेलिब्रिटी को उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत जवाबदेह ठहराता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मौषमी चटर्जी को गोवा कार्यक्रम में न आने के कारण 3 लाख रुपये लौटाने का आदेश मिला।
- आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमेबाजी लागत के लिए 25,000 रुपये का भी भुगतान आदेशित किया।
- यह निर्णय दर्शाता है कि सेलिब्रिटी भी उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जवाबदेह हैं।
महाराष्ट्र के नाशिक उपभोक्ता आयोग ने 30 जून 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया, जिसमें फिल्म अभिनेत्री मौषमी चटर्जी को गोवा में आयोजित मेडिकल कॉलेज रीयूनियन के लिए 3 लाख रुपये वापस करने के साथ-साथ 1 लाख रुपये का मानसिक पीड़ा का मुआवजा और 25,000 रुपये के मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
यह मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी चिकित्सक द्वारा दायर शिकायत पर आधारित था, जिन्होंने गोवा में अपने बैच के साथियों के लिए एक यादगार रीयूनियन की योजना बनाई थी। चटर्जी को ईमेल के माध्यम से आमंत्रण भेजा गया था और उन्होंने 3 लाख रुपये की फीस के बदले कार्यक्रम में भाग लेने पर सहमति जताई। आयोजक ने पहले 2 लाख रुपये RTGS के माध्यम से अग्रिम में भेजे, जबकि शेष राशि कार्यक्रम के दौरान नकद में देने का प्रावधान था।
आयोग के अनुसार, चटर्जी ने 17 नवंबर 2023 को गोवा पहुँचने के बावजूद कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुँची और अगले दिन ही प्रस्थान कर गई। आयोजक द्वारा बार-बार ईमेल के माध्यम से धनवापसी का अनुरोध करने के बावजूद, चटर्जी ने राशि वापस नहीं की। आयोग ने इस व्यवहार को “सेवा में कमी” के रूप में परिभाषित किया, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की परिभाषा के अनुरूप है।
कानूनी दृष्टिकोण से यह निर्णय एक स्पष्ट संदेश देता है कि सेलिब्रिटी, चाहे कितनी भी प्रसिद्ध हों, उपभोक्ता संरक्षण के नियमों से ऊपर नहीं हैं। यह न केवल व्यक्तिगत मामलों में बल्कि पूरे मनोरंजन उद्योग में अनुबंध के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एक मिसाल कायम करता है।
आयोग के अध्यक्ष ने कहा, “यदि किसी भी पक्ष को अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थता का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। चटर्जी द्वारा कार्यक्रम में न आने के कारण आयोजक को वित्तीय और भावनात्मक नुकसान हुआ, जिसे न्यायसंगत रूप से मुआवजा दिया जाना चाहिए।” यह निर्णय भविष्य के अनुबंधों में स्पष्ट शर्तों और जिम्मेदारियों को निर्धारित करने के महत्व को रेखांकित करता है।