पुणे के मोशी कचरा डिपो में कचरा‑से‑ऊर्जा संयंत्र के ढहने से 23 कर्मचारियों में से सात के शव बरामद हुए। एक देखरेखकर्ता अभी भी खोज में है, जबकि अधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 72 घंटे में सात शव बरामद
- एक कार्यकर्ता अभी भी खोज में
- भारी मशीनरी के उपयोग से बचाव में मदद
पुणे के पिंपरी‑चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) के मोशी कचरा डिपो में स्थित कचरा‑से‑ऊर्जा संयंत्र की दो‑मंजिला इमारत बुधवार को ढह गई, जिससे 23 कर्मचारियों को खतरा हुआ। घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और अग्निशमन दल ने बड़े पैमाने पर बचाव कार्य किया।
घटना का विवरण
डिपो में लगभग 15 लाख टन कचरा 10 एकड़ क्षेत्र में जमा था। भारी बारिश ने लगभग 5 लाख टन कचरे को ढीला कर दिया, जो अंततः इमारत के नीचे फिसल गया। शुरुआती बचाव में पाँच कार्यकर्ता ने खुद बच निकलने में कामयाबी पाई, जबकि नौ अन्य को टीमों ने निकाला। सात शवों की पहचान अक्षय सावंत और सुनील कोरके आदि के रूप में की गई।
खोज जारी
शेष एक व्यक्ति, माना जाता है कि वह देखरेखकर्ता था, अभी भी डिपो के आसपास खोजा जा रहा है। बचाव दल ने शुरुआती दिनों में भारी उपकरणों के प्रयोग से बचा क्योंकि वे जीवित बचाव की संभावना को खतरे में डाल सकते थे, परन्तु अब भारी जेकब और एक्सकेवेटर का उपयोग कर सात शवों को बरामद किया गया।
प्रशासन का जवाब
पीसीएमसी ने कहा कि कचरा ढेर और संयंत्र के बीच 30 मीटर की सुरक्षा दूरी थी, जबकि सैटेलाइट इमेजिंग ने इस दूरी को 16‑17 मीटर बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनविस ने घटना की समीक्षा की, लेकिन स्थल पर नहीं गए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को सहायता देने का आदेश दिया और कचरे के बायोमाइनिंग को तेज करने का निर्देश दिया।
भविष्य की चुनौतियां
यह दुर्घटना भारत में कचरा‑से‑ऊर्जा परियोजनाओं की सुरक्षा मानकों और शहरी कचरा प्रबंधन की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन के बड़े कचरा ढेरों के पास औद्योगिक संरचनाओं का निर्माण भविष्य में और अधिक गंभीर दुर्घटनाओं को जन्म दे सकता है।