रंगरेड्डी जिले के 35 वर्षीय आरोपी ने पोकसो केस के बाद बैंह पर रिहा होकर 16‑वर्षीय लड़की, उसकी माँ और दादी की हत्या कर, फिर अपनी पत्नी और दो बेटों को भी मार डाला। पुलिस अब गवाहों और परिवार की मदद से अपराधी को ढूंढ रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पोकसो केस के बाद बैंह पर रिहा हुआ आरोपी ने 6 लोगों की हत्या की।
- हत्याकांड में किशोरी, उसके परिवार और स्वयं के परिवार के सदस्यों को शामिल किया गया।
- पोलिस अब सक्रिय खोज अभियान चलाकर आरोपी को पकड़ने की कोशिश कर रही है।
रंगरेड्डी, तेलंगाना – 11 जुलाई 2026 को एक भयानक हत्या की श्रृंखला ने शहर के लोगों को चौंका दिया। 35‑वर्षीय पुरुष, जिसे 16‑वर्षीय लड़की को परेशान करने के आरोप में पोकसो केस के तहत गिरफ्तार किया गया था, ने बैंह पर रिहा होने के बाद अपनी नयी भयानक कहानी लिखी।
घटना का विवरण
रात के 10:45 बजे, आरोपी ने अपने गाँव से 6 किमी की दूरी पर स्थित शहर के घर में प्रवेश किया, जहाँ 16‑वर्षीय किशोरी और उसके परिवार का पोकसो केस दर्ज था। उसने माँ को चाकू से मार डाला, फिर दादी को भी उसी घर में मारकर बिस्तर पर रख दिया। उसके बाद, उसने किशोरी को अपनी कार में ले जाकर एक झील के पास ले गया, जहाँ उसने उसे कात कर दे दिया। केवल मानसिक रूप से विकलांग बहन को अनछुआ छोड़ दिया गया।
परिवार पर हमला
इसके बाद आरोपी अपनी स्वयं की निवास पर लौट आया और 31‑वर्षीय पत्नी तथा 4‑वर्षीय और 18‑माह के दो बेटों को भी एक ही रात में घातक रूप से घायल कर दिया। पुलिस का मानना है कि यह क्रूर कार्य एक गहरी मनोवैज्ञानिक संकट का संकेत हो सकता है, परंतु अभी तक कोई स्पष्ट प्रेरणा सामने नहीं आई है।
क़ानूनी पृष्ठभूमि और बैंह की भूमिका
मई में पोकसो केस दर्ज होने के बाद, आरोपी ने जमीनी स्तर पर गुमनाम रहकर बैंह के लिए आवेदन किया। जून में उसे बैंह पर रिहा कर दिया गया क्योंकि मामले में सज़ा 7 वर्षों से कम होने की संभावना थी। यह घटना न्याय व्यवस्था की बैंह प्रक्रियाओं पर सवाल उठाती है, खासकर जब पीड़ितों के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
पोलिस की खोज और आगे की कार्रवाई
अपराध के बाद, आरोपी ने अपने पिता को फोन करके घटना का खुलासा किया और फिर गाड़ी में बैठ कर गाँव से भाग गया। पुलिस ने तुरंत ही खोज अभियान शुरू किया, और अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। यदि पकड़ा गया, तो आरोपी पर हत्या, पोकसो और अवैध बैंह के आरोप लगेंगे।
समाज पर प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँ
इस घटना ने पोकसो के मामलों में बैंह और रिहाई के प्रावधानों की समीक्षा की मांग बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंह के नियमों को सख्त करने के साथ-साथ पीड़ितों की सुरक्षा के लिए अधिक त्वरित जांच प्रक्रियाएँ अपनानी चाहिए। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और जागरूकता को बढ़ाना भी आवश्यक है, ताकि ऐसे आपराधिक उन्माद को रोका जा सके।