केरल के वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन के बाद लापता एकमात्र कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा की तलाश छठे दिन भी जारी है। एनडीआरएफ सहित कई सुरक्षा एजेंसियां मीनाचिल नदी और मलबे के क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हिमाचल प्रदेश के लापता कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा की तलाश में छठे दिन भी खोजी अभियान जारी है।
  • अनाक्कमपॉयल-कल्लाडी-मेप्पडी टनल प्रोजेक्ट साइट पर आए इस भूस्खलन में अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है।
  • एनडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों सहित कई एजेंसियां मीनाचिल नदी के किनारों पर सेक्टर-वार तलाशी ले रही हैं।

केरल के वायनाड जिले में अनाक्कमपॉयल-मेप्पडी टनल निर्माण स्थल पर आए विनाशकारी भूस्खलन के छह दिन बाद भी बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। इस आपदा में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हिमाचल प्रदेश के रहने वाले कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा अभी भी लापता हैं। बहु-एजेंसी खोज दल लगातार छठे दिन भी उनकी तलाश में जुटे हुए हैं।

सघन तलाशी अभियान और प्रशासनिक मुस्तैदी

केरल के कृषि मंत्री टी सिद्धीक के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), विशेष अभियान समूह (SOG), अग्निशमन एवं बचाव सेवा, रैपिड रिस्पांस टीम और वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय युवा स्वयंसेवक दल इस अभियान में शामिल हैं। खोज क्षेत्र को मीनाचिल नदी के बहाव के साथ विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया है, ताकि नदी के दोनों किनारों पर सघन तलाशी ली जा सके। आशंका जताई जा रही है कि शव मलबे या भारी चट्टानों के नीचे दबा हो सकता है, जिसके कारण खोजी दल बेहद सावधानी से काम कर रहे हैं।

तकनीकी सहायता और प्रत्यक्षदर्शियों के इनपुट

बचाव दल लापता मैनेजर का सुराग लगाने के लिए आधुनिक तकनीकों और उपलब्ध सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का सहारा ले रहे हैं। घटना के समय मौजूद अन्य श्रमिकों से मिली जानकारी के आधार पर कुछ विशिष्ट स्थानों को चिह्नित किया गया है। विशेष रूप से एक ऊपरी तालाब के पास खोजी अभियान केंद्रित किया गया है, जहां भूस्खलन के कारण लोहे की छड़ें और भारी मलबा जमा हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राणा को आखिरी बार इसी क्षेत्र के पास देखा गया था।

पश्चिमी घाट में विकास बनाम पर्यावरण की बहस

पश्चिमी घाट (Western Ghats) का यह क्षेत्र अपनी नाजुक पारिस्थितिकी के लिए जाना जाता है। वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी जुड़वां सुरंग परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों ने पहले भी चिंताएं जताई थीं। अत्यधिक वर्षा और संवेदनशील भूवैज्ञानिक संरचना के कारण इस क्षेत्र में भारी निर्माण कार्य भूस्खलन के खतरे को बढ़ा देते हैं। यह आपदा एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित करती है।

यातायात प्रतिबंध और विशेषज्ञ जांच

इस बीच, आपदा के कारणों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम जल्द ही दुर्घटनास्थल का दौरा करेगी। खोज अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों ने मेप्पडी-चूरलमाला मार्ग पर सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक यातायात प्रतिबंध लागू किए हैं, ताकि राहत सामग्री और बचाव वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा न आए।