बाहरी‑उत्तरी दिल्ली के मुख़मेलपुर गांव में दो बच्चों की बारिश के पानी से भरपूर खाई में गिरकर मौत हो गई, जबकि पास के हिरंकी गांव में चार बच्चे यमुना में बहकर गायब हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कई एजेंसियों को बचाव कार्य में तैनात किया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मुख़मेलपुर में दो बच्चों की खाई में डुबकी से मौत
- हिरंकी में चार बच्चों का यमुना में लुप्त होना
- पुलिस ने व्यापक जांच और बचाव अभियान शुरू किया
दिल्ली के बाहरी‑उत्तरी जिले में स्थित मुख़मेलपुर गांव में रविवार को दो छोटे बच्चों, आयुष (8) और नितेश (10), की मौत हो गई जब वे बारिश के पानी से भरपूर एक खाई में गिर गए। यह खाई खेत से अतिरिक्त जल निकासी के लिए खोदी गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज़ कर दिया।
घटना की विस्तृत पृष्ठभूमि
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बच्चे अपने घरों के पीछे के खेत में अन्य बच्चों के साथ खेल रहे थे। अचानक उन्होंने फिसल कर खाई में गिरते ही डूब जाना शुरू कर दिया। पास के गाँव वाले तुरंत आवाज़ सुन कर मौके पर पहुंचे, बच्चों को बाहर निकाला और निकटतम बाबु जगजीवन राम अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
यमुना में चार बच्चों का लुप्त होना
इसी दिन शाम को हिरंकी गांव के चार छोटे लड़के यमुना में स्नान करने गए। पुलिस के अनुसार, पाँच लड़के (उम्र 14‑15) नदी के पास गए, जिसमें से चार तेज़ धारा में बह कर गायब हो गए, जबकि पाँचवां बच निकल कर मदद के लिए बुलाया। एक आपातकालीन कॉल 7:46 pm पर अलिपुर पुलिस स्टेशन पर आया, जिसके बाद पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और उपभाषा मजिस्ट्रेट ने एक समन्वित बचाव अभियान शुरू किया।
जांच और कानूनी कदम
मुख़मेलपुर में हुई मौतों को लापरवाही के कारण दर्ज किया गया है और अलिपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला कि खेत के मालिक ने खाई खोदी थी, लेकिन सुरक्षा बाड़ या चेतावनी संकेत नहीं लगाए थे। परिवार ने खेत के मालिक पर आरोप लगाया है और पुलिस ने जांच के परिणामों के आधार पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
भविष्य की सुरक्षा के लिए सुझाव
यह दुखद घटना ग्रामीण भारत में जल निकासी संरचनाओं की सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खाइयों के चारों ओर बाड़, चेतावनी संकेत और नियमित निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए, विशेषकर जब आसपास बच्चे खेलते हों। साथ ही, नदी किनारे बच्चों की निगरानी के लिए स्थानीय प्रशासन को जागरूकता अभियानों की जरूरत है।