पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि चार सान्झ राहत केंद्र महिलाओं को संकट से बाहर निकालने, ट्रॉमा दूर करने और सामान्य जीवन जीने में मदद कर रहे हैं। इन केन्द्रों ने दो वर्षों में 1,069 मामलों की पंजीकरण और 1,656 स्क्रीनिंग की है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पंजाब में चार सान्झ राहत केंद्र संचालित
  • 1,069 महिला मामलों का पंजीकरण, 1,656 स्क्रीनिंग
  • समुदाय‑पोलिसिंग मॉडल ने कई सफलताएँ दर्ज की

पंजाब पुलिस के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने हाल ही में बताया कि राज्य में चार सान्झ राहत केंद्र (SRK) महिलाओं को संकट के बाद पुनर्स्थापित करने के लिए समग्र सहायता प्रदान कर रहे हैं। ये केन्द्र मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और जालंधर में स्थित हैं और पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशिक्षित काउंसलरों के सहयोग से चलाए जाते हैं।

पश्चभूमि और उद्देश्य

साल 2011 में शुरू किया गया सान्झ इकोसिस्टम, महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक समुदाय‑पोलिसिंग पहल के रूप में विकसित हुआ। इसका मुख्य लक्ष्य ट्रॉमा‑से‑पड़ित महिलाओं को काउंसलिंग, कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास के लिए एक ही छत के नीचे समाधान प्रदान करना है। इस मॉडल ने अब तक 530 से अधिक सान्झ केन्द्रों को राज्य भर में विस्तारित किया है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिक तेज़ प्रतिक्रिया संभव हुई।

संख्यात्मक उपलब्धियाँ

डिजीपी यादव ने कहा कि पिछले दो वर्षों में इन चार केन्द्रों ने लगभग 1,069 मामलों का पंजीकरण किया और 1,656 केसों की स्क्रीनिंग की है। प्रत्येक केस में पीड़ित महिला को तत्काल सुरक्षा, स्वास्थ्य निरीक्षण और मनोवैज्ञानिक समर्थन प्रदान किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, मोहाली में एक महिला को घरेलू हिंसा से बचाते हुए पुलिस ने उसे सुरक्षित घर तक पहुँचाया और उसके पति को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करवाया।

व्यावहारिक केस स्टडी

एक अन्य केस में, अकेले रहने वाली महिला को गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में भर्ती कराया गया। सान्झ राहत केंद्र की टीम ने उसे पीजीआई अस्पताल में भर्ती करवाया, दो महीने तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित की और उसके गर्भपात के बाद भावनात्मक सहायता प्रदान की। उपचार के बाद, उन्होंने उसे रोजगार दिलाने और परिवार से पुनः मिलाने में मदद की, जिससे वह सम्मानजनक जीवन जी सके।

समग्र प्रभाव और भविष्य की दिशा

सुरक्षा के अलावा, पंजाब पुलिस ने महिला‑मित्रता कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और साइबर‑क्राइम कार्यशालाओं के माध्यम से 12,482 स्कूलों, 11,75,010 बच्चों और 76,299 शिक्षकों को संवेदनशील बनाया है। ये पहल महिलाओं के अधिकारों के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में अपराध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी सामुदायिक‑आधारित मॉडल को अन्य राज्यों में भी दोहराया जाना चाहिए, क्योंकि यह न केवल त्वरित बचाव बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास सुनिश्चित करता है।