केरल हाई कोर्ट ने ईसाई महिलाओं को अपने रहने के स्थान पर तलाक के लिए दावा करने की अनुमति देने के लिए पार्लियामेंट से आग्रह किया है

केरल हाई कोर्ट ने ईसाई महिलाओं को अपने रहने के स्थान पर तलाक के लिए दावा करने की अनुमति देने के लिए पार्लियामेंट से आग्रह किया है। अदालत ने कहा है कि 1869 के तलाक अधिनियम में एक भेद का पता चला है, जिसमें ईसाई महिलाओं को अपने रहने के स्थान पर तलाक के लिए दावा करने की अनुमति नहीं है। अदालत ने कहा है कि तलाक के लिए दावा करने के लिए ईसाई महिलाओं को अपने पति के साथ रहने के स्थान पर जाना होगा, जो बहुत मुश्किल हो सकता है। अदालत ने कहा है कि पार्लियामेंट को इस भेद को दूर करने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने एक मामले में कहा है कि एक ईसाई महिला ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था और एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने कहा था कि वह अपने पति के साथ रहने के स्थान पर नहीं जा सकती है, इसलिए वह तलाक के लिए दावा करना चाहती है। अदालत ने कहा है कि महिला को अपने पति के साथ रहने के स्थान पर जाना होगा, जो बहुत मुश्किल हो सकता है। अदालत ने कहा है कि पार्लियामेंट को इस भेद को दूर करने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।