एडप्पड़ी के. पालनीस्वामी ने केंद्र को निजी मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में राज्य कोटा घटाने से रोकने के लिए विधायी संशोधन करने का अनुरोध किया। उन्होंने यूजीसी को इस दिशा में सख़्त कदम उठाने और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने का आह्वान किया।

एडप्पड़ी के. पालनीस्वामी, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) के महासचिव, ने 9 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में मेडिकल और इंजीनियरिंग कोटा से संबंधित वैध संशोधन को लागू करे, ताकि ऐसी संस्थाओं को ‘डील्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ (Deemed University) के रूप में मान्यता मिलने पर भी राज्य कोटा घटाया न जाए।

पृष्ठभूमि और मौजूदा समस्या

पिछले कुछ वर्षों में कई निजी मेडिकल कॉलेजों ने ‘डील्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ की स्थिति प्राप्त की है। इस प्रक्रिया में अक्सर राज्य कोटा पर पुनः विचार किया जाता है, जिससे तमिलनाडु सरकार को चिकित्सा सीटों में कमी का सामना करना पड़ता है। राज्य की ओर से यह चिंता है कि इससे स्थानीय छात्रों के प्रवेश अवसर घटेंगे और स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा।

केंद्रीय सरकार और यूजीसी की भूमिका

पालनीस्वामी ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) को इस मुद्दे में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूजीसी को नियमावली में स्पष्ट प्रावधान करना चाहिए, जिससे ‘डील्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ की स्थिति में भी राज्य कोटा संरक्षित रहे। इस दिशा में कदम उठाने से न केवल छात्रों के अधिकार सुरक्षित होंगे, बल्कि निजी संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की अपील

केंद्रीय सरकार से केवल कोटा सुरक्षा की मांग के साथ-साथ, पालनीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार को सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बुनियादी सुविधाओं को उन्नत करने और अतिरिक्त सीटें जोड़ने का भी निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि यदि सरकारी संस्थानों की क्षमता बढ़ाकर अतिरिक्त सीटें प्रदान की जाएँ, तो निजी संस्थानों में कोटा घटाने से उत्पन्न नुकसान को संतुलित किया जा सकता है।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

यह बयान राज्य के स्वास्थ्य नीति में चल रहे बहस को उजागर करता है, जहाँ मौजूदा सरकार (तमिलनाडु वैत्री कड़गम) को शैक्षिक एवं स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस समय, पालनीस्वामी ने त्रिची जिले में पार्टी की कार्यवाही की समीक्षा भी की, जहाँ ललगुड़ी विधानसभा सदस्य लीमा रोज़ मार्टिन सहित कई विद्रोही सदस्य पार्टी के भीतर सक्रिय थे। यह राजनीतिक गतिशीलता इस मुद्दे को और जटिल बनाती है, क्योंकि विभिन्न दलों के अपने-अपने हित और रणनीतियाँ हैं।

कुल मिलाकर, पालनीस्वामी का यह अपील न केवल तमिलनाडु के मेडिकल शिक्षा के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयत्न है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा नीति में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी हो सकता है।