समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के अजय राय ने उजागर किया कि आयोध्या मंदिर में दान के दुरुपयोग से भाजपा की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विश्वसनीयता पर धक्का लगा है, जिससे विदेशी निवेशकों की रुचि कम हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से जिम्मेदारी लेने और पारदर्शी जांच की माँग की।
उत्तरी प्रदेश की राजनीति में इस हफ्ते एक नया तूफ़ान आया, जब समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि आयोध्या में राम मंदिर के दान में धांधली के आरोपों ने भाजपा को "वैश्विक स्तर पर भरोसेमंदता" खोने पर मजबूर किया है। वह यह भी जोड़ते हुए बोले कि सन्तानिक समुदाय के सदस्य, जो विदेशों में रहते हैं, अब भारत में निवेश करने में हिचकिचा रहे हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
राम मंदिर का निर्माण 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा हुआ, और इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना गया। इस परियोजना के लिए लाखों रुपये दान के रूप में जुटाए गए। परंतु 2026 में दान के बॉक्स से धन के गायब होने की खबर सामने आई, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे। इस मामले में कई दानदाता, जिनमें विदेशों के भारतीय भी शामिल हैं, ने अपने फंड वापस ले लिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
अखिलेश यादव ने कहा, "बिजीपी सरकार ने अपने ही देवताओं के दान बॉक्स को भी नहीं बचाया, तो वह हमारे निवेश को कैसे सुरक्षित रखेगी?" उन्होंने इस बात को उजागर किया कि दान के चोरी होने की खबर ने सन्तानिक समुदाय में गहरी निराशा पैदा की है। इसी दौरान कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मोदी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने मंदिर निर्माण में सरकार की भूमिका को स्वीकार करने के साथ-साथ दान घोटाले में जिम्मेदारी लेने की मांग की। राय ने कहा, "एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में उपलब्धियों की सराहना और संस्थागत जवाबदेही साथ-साथ चलनी चाहिए।"
आर्थिक एवं अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों से विदेशी निवेशकों की भरोसेमंदता पर सीधा असर पड़ता है। जब किसी सरकार से धार्मिक और आर्थिक दोनो क्षेत्रों में भरोसा नहीं रहता, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों और वैकल्पिक निवेशकों के लिए भारत कम आकर्षक बन जाता है। इस पर, कई अंतरराष्ट्रीय फंड मैनेजर्स ने अपने पोर्टफोलियो में भारतीय एसेट्स को पुनः मूल्यांकन करने का संकेत दिया है।
आगे का रास्ता
समाजवादी और कांग्रेस दोनों ने स्वतंत्र फोरेंसिक जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग की है, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यदि इस मुद्दे पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती, तो भाजपा को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी छवि पुनः स्थापित करने में कठिनाई होगी।