दिल्ली में भारी वर्षा के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सार्वजनिक कार्य विभाग के मंत्री पर्शेश साहिब सिंह ने जलभराव‑प्रवण क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया। विभाग ने 48 घंटे में 120 से अधिक शिकायतें दर्ज कर 15‑30 मिनट में अधिकांश जलभराव साफ़ कर दिया।
नई दिल्ली – गुरुवार को तेज़ बरसात ने राजधानी को प्रभावित किया, जिससे कई प्रमुख स्थानों पर जलभराव हुआ। इस स्थिति का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) के मंत्री पर्शेश साहिब सिंह ने मिलकर स्थल निरीक्षण किया।
जलभराव पर त्वरित प्रतिक्रिया
पडव विभाग ने बताया कि पिछले 48 घंटों में लगभग 120 सार्वजनिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 40 सीधे जलभराव से जुड़ी थीं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अधिकांश जलभराव 15 से 30 मिनट के भीतर साफ़ कर दिया गया, क्योंकि वर्षा की तीव्रता और स्थल की विशेषताओं को ध्यान में रखकर त्वरित उपाय किए गए।
मोहिम की तैयारी और तकनीकी उपाय
आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस वर्ष शिकायतों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम रही, क्योंकि विभाग ने कई महीनों से व्यापक मौसमी योजना लागू की थी। 45 जलभराव‑प्रवण स्थानों की पहचान की गई है, जिनमें प्रमुख अंडरपास और पुल शामिल हैं, और 179 सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी की जा रही है। इसके अतिरिक्त, 167 स्थलों पर 754 स्थायी पंप और 273 स्थलों पर 305 अस्थायी पंप तैनात किए गए हैं, जिससे किसी भी आकस्मिक जलभराव पर तुरंत कार्यवाही संभव हो सके।
मुख्यमंत्री की निरीक्षण यात्रा
सीएम गुप्ता ने अपने विधानसभा क्षेत्र शालिमार गांव में स्थित जल निकासी व्यवस्था का निरीक्षण किया और अधिकारियों को उचित जल निकासी सुनिश्चित करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, "सख्त आदेश और मौसमी तैयारी के कारण अब जलभराव कम हो रहा है, लेकिन सतर्कता जारी रहेगी।"
मॉनसून कंट्रोल रूम का भूमिका
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने 24×7 मोनसून कंट्रोल रूम से लाइव सीसीटीवी फीड देखी, फील्ड ऑपरेशनों का मूल्यांकन किया और दिल्ली भर में अधिकतम तत्परता बनाए रखने का निर्देश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कई क्षेत्रों में 100 mm से अधिक बारिश हुई, फिर भी मिंटो ब्रिज, ज़खीरा, धौलाकुंड और मूलचंद जैसे जलप्रवण स्थानों में कोई बड़ा ट्रैफ़िक व्यवधान नहीं हुआ।
भविष्य की दिशा
प्रमुख अधिकारियों ने कहा कि जलभराव की हर शिकायत को वास्तविक‑समय में मॉनिटर किया जाता है और तत्काल प्रतिक्रिया के लिए फील्ड इंजीनियर, सहायक अभियंता और आपातकालीन टीमों को तैनात किया जाता है। विभाग ने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों में रिंग रोड, ISBT, तिलक मार्ग आदि क्षेत्रों में भी जलभराव नहीं हुआ, जो व्यापक तैयारी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।