बिहार के बैंकिपुर बायपोल में बीजेपी उम्मीदवार ने अचानक परिवार कारणों का हवाला देते हुए पदत्याग किया। पार्टी ने तुरंत नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया, जिससे प्राशांत किशोर की पहली चुनावी चुनौती का मंच तैयार हो गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बीजेपी उम्मीदवार ने परिवार कारणों से बायपोल से हटने की घोषणा की
  • नीरज कुमार सिन्हा को नई उम्मीदवारी मिली
  • प्राशांत किशोर का चुनावी पदार्पण इस सीट पर होगा

बिहार के बैंकिपुर विधानसभा सीट पर आयोजित बायपोल में राजनीतिक माहौल अचानक बदल गया, जब भाजपा के उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को परिवार कारणों का हवाला देते हुए पदत्याग कर दिया। यह कदम न केवल पार्टी को अटकलबाज बना गया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई सवाल उठाए।

परिवार कारणों से इस्तीफा

अभिषेक कुमार सिन्हा ने अपने निर्णय को स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं केंद्रीय और राज्य नेतृत्व का आभारी हूँ, परंतु पारिवारिक परिस्थितियों के कारण मैं बायपोल लड़ नहीं सकता।” उन्होंने बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरूगी को एक पत्र पढ़ते हुए इस बात को दोहराया। यह पत्र पार्टी के भीतर आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत किया गया, जिससे इस निर्णय की वैधता पर चर्चा तेज़ हुई।

नए उम्मीदवार का चयन

पार्टी ने तुरंत कार्यवाही करते हुए 32 वर्षीय नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। नीरज ने पहले भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) में बूथ अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष के पद संभाले हैं, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर मजबूत समर्थन मिलता है। पार्टी के बयान में कहा गया कि नीरज का अनुभव और युवा ऊर्जा बायपोल को फिर से जीतने में अहम भूमिका निभाएगी।

प्राशांत किशोर की पहली चुनावी चुनौती

जैन सूरज की स्थापना करने वाले प्राशांत किशोर ने इस बायपोल को अपनी पहली चुनावी लड़ाई के रूप में चुना है। शेखोहर में आयोजित सार्वजनिक बैठक में उन्होंने कहा कि वह सुरक्षित सीटों की बजाय “बीजु के किले” जैसी भाजपा की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्रों में चुनाव लड़ेंगे, ताकि बिहार में ध्रुवीकरण के बजाय विकास‑आधारित राजनीति को प्रोत्साहित किया जा सके। यह रणनीति पार्टी के लिए नई चुनौती पेश करती है, क्योंकि बैंकिपुर कई दशकों से बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है।

बायपोल का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बैंकिपुर सीट पर नीतिन नबिन ने 2025 में राजसभा के लिए स्थान छोड़ा, जिससे यह बायपोल हुआ। नबिन, जो 2025 में राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष बनकर बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए, ने इस क्षेत्र में कई बार जीत हासिल की। उनके पिता नबिन किशोर प्रसाद सिन्हा का भी यहाँ गहरा प्रभाव रहा। इस निरंतर बीजेपी प्रभुत्व के कारण विरोधी दलों की जीत मुश्किल रही है, जिससे इस बार का बायपोल राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखता है।

आगे की राह

बायपोल के मतदान 30 जुलाई को निर्धारित है, जबकि मतदान परिणाम 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई है, और अब सभी प्रमुख पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों को घोषित कर दिया है। इस चुनाव में राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रतिनिधि रेखा कुमारी (उर्फ़ रेखा गुप्ता) भी प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आएँगी। परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि क्या भाजपा का दशकों पुराना राजसत्ता टूटेगा या प्राशांत किशोर की नई राजनीति सफल होगी।