कोयंबटूर नगर निगम ने आवरम्पालयम के पास बालाजी नगर में स्थित 7‑सेन्ट की ओएसआर जमीन पर बना तीन‑मंजिला व्यावसायिक भवन ध्वस्त किया। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे शहरी नियोजन में क़ानूनी प्रवर्तन की नई मिसाल कायम हुई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोयंबटूर में 7‑सेन्ट की OSR जमीन पर बना 3‑मंजिला भवन ध्वस्त
  • भवन की कीमत लगभग ₹3 करोड़, 1971 के लेआउट में आरक्षित
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिससे पुनः प्राप्ति संभव हुई

कोयंबटूर नगर निगम ने शुक्रवार को बालाजी नगर, आवरम्पालयम के पास स्थित 7‑सेन्ट की ओपन स्पेस रिज़र्वेशन (OSR) जमीन पर बना तीन‑मंजिला व्यावसायिक भवन ध्वस्त किया। यह कदम उसी समय उठाया गया जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को पुष्टि कर दिया, जिससे नगर निगम को जमीन पुनः प्राप्त करने का अधिकार मिला।

OSR जमीन का इतिहास और महत्व

1971 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को सार्वजनिक खुले स्थान (OSR) के रूप में निर्धारित किया गया था। दो दशकों से अधिक पहले इस जमीन पर अनधिकृत अतिक्रमण हुआ, जिसके बाद लगभग 11,000 वर्ग फुट का निर्माण किया गया और विभिन्न व्यापारिक इकाइयों को किराए पर दिया गया। इस प्रकार की अनधिकृत अतिक्रमण शहरी नियोजन के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है और सार्वजनिक स्थानों की कमी को और बढ़ाता है।

क़ानूनी लड़ाई: हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक

2016 में कोयंबटूर निगम ने इस अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने नगरपालिका को जमीन की पुनः प्राप्ति करने का आदेश दिया, परंतु भवन के किरायेदारों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की। जुलाई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के निर्णय को कायम रखते हुए अपील खारिज कर दी, जिससे नगरपालिका को वैध रूप से ध्वस्त करने की अनुमति मिली।

ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और भविष्य की दिशा

निर्णय के बाद, नगर निगम ने टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारियों की देखरेख में ध्वस्तीकरण की तैयारी की। प्रभावित व्यावसायिक संस्थानों को आधिकारिक नोटिस जारी किए गए, और नियोजित समय पर कार्य शुरू किया गया। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय निकाय सार्वजनिक हित में क़ानूनी उपायों को तेज़ी से लागू करने के लिए तैयार है।

शहरी नियोजन पर संभावित प्रभाव

इस घटना से शहरी नियोजन में क़ानूनी प्रवर्तन की नई मिसाल स्थापित हुई है। यदि अन्य नगर निगम भी इसी प्रकार के अतिक्रमणों को रोकने के लिए समान कदम उठाते हैं, तो भविष्य में सार्वजनिक खुली जगहों की रक्षा और शहरी विकास में संतुलन बनाए रखने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, यह निर्णय निजी निवेशकों को भी सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण से बचने के लिए चेतावनी का काम करेगा।