विषाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ई‑मेल करके अपने बेटे के हत्या मामले की तेज़ सुनवाई की अपील की। केवल 20 दिनों में बेटे के साथ‑साथ दादा का भी निधन, परिवार को गहरा शोक में डुबो रहा है।

मुख्य बिंदु

  • विषाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति को तेज़ जांच और फास्ट‑ट्रैक कोर्ट की अपील की
  • केतन की हत्या का आरोप उसकी मंगेतर सिया और उनके मित्र चेतन के ऊपर
  • परिवार दो हफ्तों में बेटे‑पिता दोनों का नुकसान झेल रहा है

पुणे के निवासी विषाल अग्रवाल ने 10 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक भावनात्मक ई‑मेल भेजा, जिसमें उन्होंने अपने बेटे केतन अग्रवाल की हत्या के केस को फास्ट‑ट्रैक अदालत में सुनने की मांग की। ई‑मेल का मुख्य उद्देश्य यह था कि न्याय प्रक्रिया में कोई देरी न हो, क्योंकि देरी से पीड़ित परिवार का दर्द और बढ़ता है।

पृष्ठभूमि और घटना

केतन की हत्या 18 जून को लोहारगढ़ किले के पास हुई, जहाँ पुलिस ने बताया कि उसकी मंगेतर सिया और उनके मित्र चेतन बाबुलाल चौधरी ने मिलकर हत्या की योजना बनाई। मामले की जांच अभी भी चल रही है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि दो युवा लोगों ने इस कृत्य को अंजाम दिया।

परिवार की दु:खद कहानी

केतन की मृत्यु के बाद, विषाल ने बताया कि उनके पिता, यानी केतन के दादा, केवल 20 दिनों में ही इस खबर से अभिभूत होकर गुजर गए। दादाजी का यह अचानक निधन, केतन के शोक को दुगुना कर गया। विषाल ने अपने ई‑मेल में लिखा, “मैं व्यापारियों या प्रभावशाली लोगों की तरह नहीं लिख रहा हूँ, मैं सिर्फ एक पिता हूँ जो अपने बेटे के लिए न्याय चाहता है।”

न्याय की जल्दी माँग

विषाल ने राष्ट्रपति को यह भी कहा कि उनका परिवार किसी विशेष उपचार की मांग नहीं कर रहा, बस यह चाहता है कि केस फास्ट‑ट्रैक कोर्ट में सुना जाए, जिससे दुष्कर्मियों को सख्त सज़ा मिल सके। उन्होंने राष्ट्रपति से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की भी अपील की, ताकि केस को “एक और फ़ाइल” न बनना पड़े।

संभावित प्रभाव और आगे की राह

यदि राष्ट्रपति के हस्तक्षेप से इस केस को फास्ट‑ट्रैक कोर्ट में लाया जाता है, तो यह न केवल इस परिवार के लिए बल्कि पूरे महाराष्ट्र में न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और त्वरित कार्यवाही का एक उदाहरण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ सुनवाई से पुलिस को साक्ष्य एकत्र करने और आरोपियों को जल्द ही अदालत में पेश करने में मदद मिल सकती है, जिससे सार्वजनिक विश्वास को भी पुनर्स्थापित किया जा सकेगा।