मायसूर नगर निगम (MCC) ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में फुटपाथ पर लगी अवैध दुकानों और स्टॉल को हटाने की तेज़ कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए दो दिनों में साफ‑सफाई अनिवार्य की गई है, जबकि विक्रेताओं ने अपने जीवन‑यापन को लेकर चिंताएँ जताई हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मायसूर नगर निगम ने फुटपाथ से किफ़ायती व्यावसायिक स्टॉल हटाए
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत दो दिन में सफ़ाई अनिवार्य
  • विक्रेताओं ने रोजगार की चिंता व्यक्त की, पुनर्वास की माँग की

मायसूर शहर निगम (MCC) ने बेंगलुरु में चल रही फुटपाथ एन्क्रॉचमेंट विरोधी पहल के बाद अपने शहर में भी समान कार्रवाई शुरू कर दी है। मेटागली, केआरएस रोड, और कालीदासा रोड के कुछ प्रमुख क्षेत्रों में किओस्क, पुश‑कार्ट और अन्य अवैध संरचनाओं को हटाया गया, जिससे पैदल यात्रियों के लिए मार्ग सुरक्षित हो सके।

पिछला पृष्ठभूमि और कानूनी ढाँचा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सार्वजनिक सड़कें और फुटपाथ सार्वजनिक संपत्ति हैं और उन्हें किसी भी परिस्थिति में अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्थापित किया कि फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिये मुक्त रखना उनका मूल अधिकार है। इस निर्णय के आलोक में, MCC ने दो‑दिन की समयसीमा निर्धारित की है, जिसमें सभी अतिक्रमणकारी को अपने स्टॉल हटाने होंगे, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

प्रभावित विक्रेताओं की स्थिति

फुटपाथ पर काम करने वाले कई विक्रेता अपने परिवारों की आजीविका के लिये इन छोटे‑छोटे स्टॉल पर निर्भर हैं। उन्होंने बताया कि इन दुकानों से ही वे अपने बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की देखभाल और स्वास्थ्य खर्चे कवर करते हैं। कई विक्रेताओं ने कहा कि वे दशकों से इस काम में हैं और अन्य कोई विकल्प नहीं है।

विपक्षी आवाज़ और प्रस्तावित समाधान

कर्नाटक राज्य स्ट्रीट वेंडर्स महामंडला के नेता भास्कर श्रीनिवास राजे उर्स, जो MCC के टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य भी हैं, ने इस कदम के वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स (संरक्षण एवं नियमन) अधिनियम, 2014 के तहत सर्वेक्षण पूरा होने और विक्रेताओं को पहचान‑पत्र मिलने तक किसी को भी बेदखल नहीं किया जा सकता। उन्होंने पुनर्वास के लिए विक्रेताओं के साथ परामर्श करने की भी मांग की।

भविष्य की दिशा

यदि MCC इस आदेश को सख्ती से लागू करता है तो फुटपाथ पर ट्रैफ़िक जाम और दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम शहरी योजना में पैदल यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। परन्तु, विक्रेताओं के पुनर्वास और वैकल्पिक आय स्रोतों की व्यवस्था न होने पर सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है, जिससे शहर में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।