मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि नई सीमांकन के बाद मध्य‑2029 में चुनाव होंगे और कांग्रेस 117 विधानसभा सीटें जीतकर दूसरी लगातार सरकार बनाएगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सीमांकन के बाद तेलंगाना के चुनाव मध्य‑2029 में हो सकते हैं।
- कांग्रेस 117 विधानसभा सीटें जीतने का अनुमान लगा रहा है।
- बीआरएस की राजनीतिक गिरावट और कांग्रेस की निरंतर जीत के संकेत।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने खम्माम जिले के जगन्नाधापुरम में आयोजित ‘रिथु आशिर्वाद सभा’ के दौरान बताया कि 2029 में मध्य‑2025 के बाद होने वाली सीमांकन प्रक्रिया के कारण तेलंगाना में अगला विधानसभा चुनाव दिसंबर 2028 के बजाय मई‑जून 2029 में आयोजित किया जा सकता है। इस बयान से यह स्पष्ट हुआ कि राज्य की राजनीति में अगले दो‑तीन सालों में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।
सीमांकन का पृष्ठभूमि
भारत सरकार ने 2023 में सीमांकन अधिनियम पारित किया, जिससे कई राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों की पुनर्संरचना निश्चित हुई। तेलंगाना में यह प्रक्रिया विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वर्तमान में 119 विधानसभा सीटें हैं, जिन्हें 182 तक बढ़ाने की संभावना है। साथ ही लोकसभा सीटें 17 से 26 तक बढ़ेंगी, जिसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।
कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी
रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस 2029 के चुनाव में 117 विधानसभा सीटें जीतकर दो लगातार शासक अवधि का लक्ष्य हासिल कर लेगी। वह यह भी अनुमानित कर रहे हैं कि नई 26 लोकसभा सीटों में से 20 सीटें कांग्रेस के पास होंगी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी को मजबूत स्थिति मिलेगी। उन्होंने राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री बनते देखे जाने की आशा जाहिर की।
विपक्षी पार्टियों पर आरोप
मुख्यमंत्री ने केंद्र में स्थित बीजेपी‑नेतृत्व वाली सरकार पर सीमांकन विधेयक को “हुक या क्रोक” के माध्यम से पारित करने का आरोप लगाया। उन्होंने त्रिनामूल कांग्रेस (TMC) और आम आदमी पार्टी (AAP) में विभाजन को भी इस विधेयक के समर्थन में एक रणनीति बताया। बीआरएस के खिलाफ भी उन्होंने निरंतर झूठी खबरें फैलाने और आंतरिक कलह को उजागर करने का आरोप लगाया, साथ ही बीआरएस को बीजेपी के साथ विलय की कोशिशों का हवाला दिया।
भविष्य की दिशा
यदि कांग्रेस की भविष्यवाणी सही साबित होती है, तो तेलंगाना में एक नई राजनीतिक स्थिरता स्थापित हो सकती है। राज्य के किसान‑केन्द्रित ‘रिथु भरोसा’ योजना जैसी पहलों को जारी रखने से कृषि आय में सुधार की उम्मीद है। वहीं बीआरएस को अब अपने समर्थन आधार को पुनः सुदृढ़ करने और कर्ज़ के बोझ को घटाने के लिए ठोस नीतियों की आवश्यकता होगी। इस परिवर्तनशील माहौल में चुनावी रणनीतियों, गठबंधनों और मुद्दों की पुनः जांच अनिवार्य हो जाएगी।