UDAN 2.0 योजना का उद्देश्य छोटे शहरों को हवाई कनेक्टिविटी प्रदान करना और इसे वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाना है। नई स्कीम में हवाई अड्डे का विकास, हेलिकॉप्टर कनेक्टिविटी और स्वदेशी विमानों का उपयोग शामिल है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ की आशा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विकसित UDAN 2.0 में केवल टिकट सब्सिडी नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचा भी शामिल है।
  • आगामी 10 साल में सरकार ₹28,840 करोड़ का निवेश कर रही है।
  • स्वदेशी विमानों और हेलिकॉप्टर नेटवर्क से क्षेत्रीय हवाई यातायात को सुदृढ़ करने का लक्ष्य।

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई को जोधपुर हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया, तो उन्होंने विकसित UDAN (Viksit UDAN) योजना की शुरुआत की। यह योजना 2016 में लागू हुए मूल UDAN (Ude Desh ka Aam Nagrik) का विस्तारित रूप है, जो अब केवल टिकेट सब्सिडी तक सीमित नहीं रही।

पहले चरण की सीख

पहले UDAN चरण ने 669 संचालनात्मक मार्गों पर 1.66 करोड़ यात्रियों को जोड़ते हुए छोटे हवाई अड्डों को फिर से जीवंत किया। हालांकि, सततता की कमी स्पष्ट हुई – 2023 के CAG ऑडिट में बताया गया कि 774 में से केवल 371 मार्गों ने संचालन शुरू किया और केवल 54 मार्गों ने सब्सिडी समाप्त होने के बाद भी सेवा जारी रखी। इस असफलता के मुख्य कारण थे अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, सीमित मांग और उच्च परिचालन लागत।

UDAN 2.0 के प्रमुख परिवर्तन

नयी योजना के तहत 10 साल में ₹28,840 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इस पूंजी का उपयोग हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण, हेलिकॉप्टर कनेक्टिविटी, स्थानीय एयरलाइन को वित्तीय समर्थन और स्वदेशी विमान निर्माताओं को प्रोत्साहन देने में होगा। सरकार ने Viability Gap Funding (VGF) को बढ़ाया है, साथ ही हवाई अड्डे के संचालन, सुरक्षा और रखरखाव के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय को सुदृढ़ किया गया है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि इस व्यापक इकोसिस्टम सफल होता है, तो छोटे शहरों को राष्ट्रीय आर्थिक नेटवर्क में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित किया जा सकता है। स्वदेशी विमानों का उपयोग करने से न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि भारत की एयरोस्पेस उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, बेहतर हवाई कनेक्टिविटी ग्रामीण विकास, पर्यटन और आपूर्ति श्रृंखला को तेज़ करेगी, जिससे दीर्घकालिक विकास में योगदान होगा।

चुनौतियाँ और राह

बड़े बजट के बावजूद, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हवाई अड्डे की सुविधाएँ समय पर पूरी हों, स्थानीय मांग को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी मार्केटिंग हो और एयरलाइन ऑपरेटरों को स्थायी लाभ मिले। यदि इन बिंदुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो फिर से वही “टिकट सब्सिडी का झंझट” दोहराया जा सकता है। इसलिए, नीति निर्माताओं को निरंतर निगरानी, डेटा‑आधारित निर्णय और निजी‑सार्वजनिक साझेदारी को सुदृढ़ करना आवश्यक है।