कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में बीजेपी ने विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) के तहत अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और डिपोर्टेशन की पुकार की है। पार्टी ने राज्य‑केन्द्र सहयोग की आवश्यकता और PRC के दुरुपयोग के जोखिम पर प्रकाश डाला।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) के माध्यम से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान आवश्यक।
  • राज्य द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) का दुरुपयोग जोखिमपूर्ण।
  • केंद्र‑राज्य सहयोग से डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज़ किया जाना चाहिए।

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के जिला अध्यक्ष सतिश कुम्पला ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) अभियान के दौरान अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करके उन्हें तुरंत बांग्लादेश भेजना चाहिए। यह बयान मणगलूर शहर में पुलिस द्वारा एक निर्माण स्थल पर नौ बांग्लादेशी श्रमिकों को हिरासत में लेने के बाद आया, जिसे कुम्पला ने ‘प्रशासन को चेतावनी’ कहा।

पृष्ठभूमि एवं SIR का महत्व

SIR, या विशेष तीव्र पुनरावलोकन, भारत के विभिन्न जिलों में चलने वाला एक व्यापक जनगणना‑समान अभियान है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के सटीक आंकड़े इकट्ठा करना और अनधिकृत प्रवासियों की खोज करना है। दक्षिण कन्नड़ में इस प्रक्रिया को लेकर स्थानीय अधिकारियों को बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या निर्धारित करने और उन्हें कानूनी कार्रवाई के तहत लाने का निर्देश दिया गया है।

PRC (स्थायी निवास प्रमाणपत्र) पर उठे सवाल

कुम्पला ने कहा कि बांग्लादेशी प्रवासी राज्य सरकार द्वारा जारी PRC का दुरुपयोग कर सकते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, PRC के लिये आवेदक या उसके माता‑पिता को कर्नाटक में कम से कम दस साल लगातार रहना अनिवार्य है। लेकिन अवैध प्रवासियों द्वारा फर्जी दस्तावेज़ और नकली आधार कार्ड का उपयोग करके इस प्रक्रिया को टालने की संभावना मौजूद है, जिससे राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण और भविष्य की कार्रवाई

कांग्रेस‑शासित राज्य सरकार द्वारा PRC जारी करने के समय SIR के चलने को लेकर कुम्पला ने संदेह जताया और इसे ‘अवैध प्रवासियों की सुरक्षा’ का प्रयास बताया। बीजेपी ने इस नीति के ख़िलाफ़ कानूनी और सार्वजनिक लड़ाई लड़ने की घोषणा की। मणगलूर के दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्रों के दो विधायक, डी. वेदव्यास कमाथ और वाय. भरत शेट्टी ने भी समान रूप से कहा कि राज्य को केंद्र के साथ मिलकर इस समस्या का निराकरण करना चाहिए, क्योंकि फर्जी दस्तावेज़ों के साथ प्रवासियों की मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है।

राय एवं संभावित प्रभाव

यदि यह मांगें पूरी नहीं हुईं तो सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, विशेषकर निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले विदेशी श्रमिकों की संख्या के कारण। साथ ही, प्रदेश में इंट्रानेशनल प्रवासियों के अनुचित लाभ के मुद्दे को लेकर भविष्य में अधिक कड़े नियम और निगरानी उपाय अपनाए जा सकते हैं। इस प्रकार, दक्षिण कन्नड़ में चल रहा SIR और PRC विवाद दोनों ही स्थानीय राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के अंतर्संबंध को उजागर करते हैं।