कांग्रेस के महासचिव मल्लीकार्जुन खड़गे ने मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन हेतु आवंटित चावल की धुलाई का आरोप लगाया, जिसमें 5 लाख टन चावल का हनन 1,200 करोड़ रुपये के नुकसान के रूप में उजागर किया गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एथेनॉल‑जुड़ा चावल घोटाला 1,200 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान
- 5 लाख टन चावल को निजी मिलों में बेच कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वापस डाला गया
- खड़गे ने भाजपा शासन में जवाबदेही के अभाव और व्यापक भ्रष्टाचार की आलोचना की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लीकार्जुन खड़गे ने 11 जुलाई को एक ट्विटर पोस्ट के माध्यम से मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन हेतु आवंटित चावल के बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि यह घोटाला न केवल राज्य की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करता है, बल्कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के पोषण सुरक्षा को भी खतरे में डालता है।
घोटाले की रूपरेखा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने एथेनॉल प्लांटों को सब्सिडी वाले चावल की आपूर्ति की थी, जिसे फिर निजी मिलों को बेचकर फिर से सरकारी गोदामों में जमा किया गया। विशेष जांच टीम (SIT) ने इस बहु‑करोड़ रुपये के घोटाले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें 5 लाख मीट्रिक टन चावल को ‘एथेनॉल‑माफिया’, चावल मिलों और भाजपा सरकार के सहयोग से मोड़ा गया है।
भाजपा के खिलाफ राजनीतिक टकराव
खड़गे ने इस मामले को भाजपा शासन के तहत “भ्रष्टाचार और लूट का केन्द्र” कहकर निरूपित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी का प्रश्न उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही का पतन हुआ है। इस आरोप में उन्होंने राज्य के पूर्व में उज्जैन में जमीन घोटाले, व्यापन स्कैम, कागज़ी लीक जैसी कई मामलों का भी उल्लेख किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार की लकीर कई वर्षों से जारी है।
इतिहास और संभावित प्रभाव
मध्य प्रदेश में 2013‑14 के व्यापन स्कैम ने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के धागे में जोड़ दिया था, जहाँ सरकारी नौकरी के प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी हुई थी। खड़गे का यह नया दावा इस नकारात्मक प्रवाह को फिर से उजागर करता है, जिससे केंद्र और राज्य स्तर पर राजनीतिक तनाव बढ़ेगा। यदि जांच में सबूत सामने आते हैं, तो यह भाजपा सरकार के लिये गंभीर राजनीतिक नुकसान और संभावित कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
अगले कदम और संभावनाएँ
वर्तमान में विशेष जांच टीम की रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद में उठाने की मांग की है, जबकि भाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि कोई भी आरोप बिना प्रमाण के नहीं माना जाएगा। इस घोटाले की सच्चाई उजागर होने पर, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की विश्वसनीयता और एथेनॉल नीति की पुनः समीक्षा आवश्यक हो सकती है।