हरियाणा कांग्रेस का नेतृत्व संघर्ष 8 जुलाई की जनरल बॉडी मीटिंग में खुल कर सामने आया, जहाँ हुड्डा और सुरजेवाला के मज़ाकिया लेकिन तीखे आदान‑प्रदान ने पार्टी की चुनावी विफलता और नई इंकॉर की भूमिका पर सवाल उठाए।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- हड़ताल में हुड्डा‑सुरजेवाला के संवाद ने कांग्रेस के नेतृत्व संकट को उजागर किया
- संजय दत्त को नया हरियाणा इंकॉर नियुक्त किया गया, लेकिन पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है
- भविष्य में राज्य में सत्ता‑संघर्ष और संभावित नेतृत्व बदलाव की संभावना
8 जुलाई को चंडीगढ़ में आयोजित कांग्रेस की जनरल बॉडी मीटिंग में, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (AICC) के नए हरियाणा इंकॉर संजय दत्त का स्वागत करने के दौरान, विपक्षी नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने हल्के‑फुल्के अंदाज़ में “तू मेरा साथ दे, फिर देख धमाका” कहा। यह टिप्पणी जल्द ही एक राजनीतिक टकराव में बदल गई।
सुरजेवाला का जवाब और उसका संकेत
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के बाद रंदीप सिंह सुरजेवाला ने तुरंत माइक्रोफ़ोन संभालते हुए कहा, “मुझे आपका साथ देने को 20 साल हो गए, अब आपकी बारी है मेरा साथ देने की।” यह उत्तर केवल मज़ाक नहीं, बल्कि अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने और संभावित नेतृत्व परिवर्तन की इच्छा को दर्शाता है।
पार्टी का चुनावी इतिहास
सुरजेवाला ने अपने बाद के भाषण में कांग्रेस के हरियाणा में चुनावी रिकॉर्ड पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 1966 में राज्य के गठन के बाद कांग्रेस ने केवल 1972, 1991 और 2005 में स्वतंत्र रूप से बहुमत हासिल किया है—कुल 56 वर्षों में केवल तीन बार। 2009 में पार्टी ने अन्य दलों से विधायक लेकर सरकार बनाई, पर वह भी स्थायी नहीं रही।
2024 चुनाव की वास्तविकता
2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतकर 46‑सीटों की औसत बहुमत से बहुत दूर रह गई। सुरजेवाला ने इस परिणाम को “कड़वी सच्चाई” कहा और कहा कि पार्टी को अब इस वास्तविकता को स्वीकार करके नई रणनीति बनानी होगी। उन्होंने नई इंकॉर संजय दत्त को चेतावनी भी दी कि यदि वह भी “मुख़ को मोड़ेगा” तो वह भी कई असफल इंकॉर की लंबी सूची में जुड़ जाएगा।
भविष्य की दिशा
हुड्डा ने तीन दशकों से कांग्रेस में प्रमुख भूमिका निभाई है, पर पार्टी के भीतर उनका समर्थन अब समान नहीं रहा। सुरजेवाला के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेता “एसआरके” समूह का समर्थन कर रहे हैं, जो हुड्डा‑केन्द्रित नेतृत्व को चुनौती दे रहा है। यह संघर्ष यदि समय पर सुलझा नहीं तो हरियाणा में कांग्रेस की पुनरुत्थान पर गहरा असर पड़ेगा।