बेंगलुरु के किड़वाई अस्पताल में irregularities उजागर करने वाली वरिष्ठ KAS अधिकारी आशा परवीन को बीडब्ल्यूएसएसबी के प्रशासनिक अधिकारी के पद पर स्थानांतरित किया गया है। यह कदम मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार के भ्रष्टाचार विरोधी बयान के साथ असंगत माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आशा परवीन को दो महीनों बाद स्थानांतरित किया गया
  • किड़वाई अस्पताल में खरीद, टेंडर और नियुक्ति में irregularities की रिपोर्ट की गई
  • राज्य सरकार ने अभी तक रिपोर्ट के अनुसार कोई कार्रवाई नहीं की

बेंगलुरु स्थित किड़वाई मेमोरियल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ऑन्कोलॉजी में वरिष्ठ केएस (KAS) अधिकारी आशा परवीन को बीडब्ल्यूएसएसबी (BWSSB) के प्रशासनिक अधिकारी के पद पर स्थानांतरित किया गया है। यह निर्णय उनके द्वारा दो महीने पहले प्रस्तुत विस्तृत रिपोर्ट के ठीक बाद आया, जिसमें अस्पताल में कई प्रशासनिक लापरवाहियों, खरीद प्रक्रिया में irregularities और संभावित भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर किया गया था।

पृष्ठभूमि और पूर्व घटनाएँ

परवीन ने पहले विक्टोरिया अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में भी समान आरोपों को उजागर किया था, जिसके बाद उन्हें उसी विभाग में स्थानांतरित किया गया था। किड़वाई अस्पताल में उनका आगमन करने के बाद, उन्होंने कई अनियमितताओं की जांच जारी रखी और सबूत-आधारित रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट को न्यायाधीश डी'कुंहा समिति ने भी स्वीकार किया, जिसने विस्तृत अनुशंसाएँ दीं, लेकिन अभी तक उनका कार्यान्वयन नहीं हुआ है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आलोचना

मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने कई बार कहा है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, परंतु इस अधिकारी के स्थानांतरण को कई राजनैतिक विश्लेषकों और सार्वजनिक प्रतिनिधियों ने विरोध का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत है, खासकर जब रिपोर्ट में उल्लेखित मुद्दे कई सालों से चले आ रहे हैं।

सरकारी स्थिति और आगे की संभावनाएँ

सरकार ने अभी तक इस ट्रांसफ़र को एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय बताया है, जबकि कई स्रोतों के अनुसार अस्पताल में नियुक्ति, टेंडर और खरीद प्रक्रिया में निरंतर irregularities पाई गई हैं। परवीन ने इस स्थानांतरण को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का इरादा जताया है, जिससे यह मामला न्यायिक समीक्षा का भी केंद्र बन सकता है।

समग्र प्रभाव

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत स्थानांतरण नहीं, बल्कि कर्नाटक में स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शिता, निगरानी और भ्रष्टाचार‑मुक्त प्रशासन की व्यापक चुनौती को दर्शाती है। यदि इस मुद्दे पर व्यापक जांच नहीं की गई, तो भविष्य में अस्पतालों में जीवन‑रक्षक सेवाओं की उपलब्धता और सार्वजनिक भरोसे पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।