पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे नेतृत्व संघर्ष के बीच, चारणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने भाजपा के प्रमुख भुपेश बघेल से चर्चा की। बैठक में अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को हटाने की मांग और पार्टी के भविष्य की दिशा पर बहस हुई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- चन्नी समूह ने भुपेश बघेल से मिलने के लिए कपूर्तला के विधायक राणा गुरजीत के घर सभा की।
- राजा वारिंग को हटाने की मांग के बावजूद, बघेल ने उच्च कमांड के निर्णय को अपरिवर्तित रखने की बात दोहराई।
- सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति ने पार्टी के आंतरिक विभाजन को सुलझाने की आशा बढ़ाई।
पंजाब कांग्रेस में हाल ही में तेज़ी से बढ़ते नेतृत्व प्रतिद्वंद्विता ने कपूर्तला के विधायक राणा गुरजीत के निवास स्थल को एक महत्वपूर्ण मंच बना दिया। पूर्व मुख्यमंत्री चारणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने इस बैठक को आयोजित किया, जहाँ राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय के प्रतिनिधि भुपेश बघेल, जो पंजाब की देखरेख में AICC के जनरल सेक्रेटरी हैं, भी उपस्थित हुए।
पृष्ठभूमि और कारण
पंजाब कांग्रेस के भीतर पिछले कई महीनों से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की अध्यक्षता को लेकर गहरी असंतुष्टि बनी हुई थी। पार्टी के कुछ वरिष्ठ सदस्य, विशेषकर चन्नी के करीबी, ने वारिंग को हटाने की माँग की है, यह मानते हुए कि वह पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में जीत दिलाने में विफल रहे हैं। इस तनाव को लेकर कई निजी बैठकें हुईं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला।
बैठक का स्वरूप
जुलाई ११, २०२६ को, कपूर्तला के घर में विशेष व्यवस्था की गई, जहाँ कई मौजूदा और पूर्व विधायक, साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री बींट सिंह के पोते गुर्किरत सिंह कोटली और गुरदासपुर के सांसद सुहजिंदर सिंह रंधावा ने भाग लिया। सभी ने कहा कि बैठक का उद्देश्य पार्टी के आंतरिक मतभेदों को सुलझाना और एकजुटता को पुनर्स्थापित करना है। चन्नी ने मीडिया से कहा कि एजेंडा पहले से नहीं बताया जा रहा है, लेकिन “परिणाम के बाद ही विस्तृत जानकारी देंगे।”
बघेल का रुख
भुपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि उच्च कमांड द्वारा किए गए पदस्थापनों को फिर से नहीं बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि “एक बार नियुक्ति होने के बाद उसे बदलना पार्टी की अनुशासनहीनता को दर्शाता है।” इस कारण से राजा वारिंग को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे स्थिति और जटिल हो गई। फिर भी, बघेल ने आश्वासन दिया कि सभी वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से समाधान निकलेगा।
संभावित परिणाम
यदि इस बैठक में वारिंग को हटाने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया, तो पार्टी के भीतर दोहरे ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ सकती है, जो अगले विधानसभा चुनाव में वोट‑बेस को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, यदि एक समझौता हो जाता है, तो कांग्रेस को पंजाब में पुनः स्थापित करने का अवसर मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बघेल की सख्त रुख पार्टी के भीतर दीर्घकालिक स्थिरता की ओर संकेत करता है, परन्तु तत्कालिक असंतोष को कम करने के लिए एक रणनीतिक समझौता आवश्यक होगा।