करूर में 27 सितंबर को हुई दंगों के बाद, डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन कांग्रेसी (DMK) के नेता सेंटिल बालाजी ने मुख्यमंत्री सी. जॉसेफ विजय पर आरोप लगाया कि उन्होंने बचाव और राहत कार्यों के दौरान जनता को पीछे छोड़ दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सेंटिल बालाजी ने मुख्यमंत्री विजय पर दंगों के समय 'अवकाश' लेने का आरोप लगाया।
  • विजय का दावा है कि DMK ने त्वरित सहायता दी, जबकि बालाजी ने इसे राजनीतिक लाभ के लिये इस्तेमाल किया कहकर आलोचना की।
  • यह विवाद करूर की आपातकालीन स्थिति में सरकार के कार्यों पर केंद्रित है।

करूर, तमिलनाडु – 27 सितंबर 2025 को करूर के एक प्रमुख बाजार में दंगों के बाद 30 से अधिक लोगों की मृत्यु और दर्जनों घायल हो गए। उस समय मुख्यमंत्री सी. जॉसेफ विजय को आपातकालीन स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब DMK के वरिष्ठ नेता सेंटिल बालाजी ने विज़न के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि उन्होंने ‘निजी विमान’ पर उड़ान भर कर अपने कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया। बालाजी ने X पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने पूछा, “कौन रहा हमारे करूर के लोगों के साथ, जब दंगों के दौरान जीवन की बचत हो रही थी?”

राजनीतिक पृष्ठभूमि

विजय, जो कि 2026 में मुख्यमंत्री बने, ने अपनी पहली यात्रा के दौरान करूर में दंगों के प्रबंधन पर DMK पर ‘राजनीतिक लाभ’ के लिए आलोचना की। उन्होंने कहा कि ‘राजनीतिक दलों को अपने कार्यों से अलग रहकर जनता की सहायता करनी चाहिए’।

विरोधाभास और आरोप

बालाजी ने दावा किया कि पूर्व सरकार के प्रमुख MK स्टालिन और उनके उपराष्ट्रपति उधायनिधि स्टालिन ने तुरंत दंगों के स्थल पर पहुँच कर ‘सच्चे रक्षक’ के रूप में कार्य किया। उन्होंने यह भी बताया कि विजय ने “एक पानी की बोतल फेंक दी, एम्बुलेंस के लिए कहा और अपनी भाषण जारी रखी।”

इस बीच, विजय ने अपनी टिप्पणियों में कहा कि दंगों की जिम्मेदारी पूरी तरह से DMK पर है, और यह कि यह घटना ‘राजनीतिक खेल’ का हिस्सा है। दोनों पक्षों ने आपस में आरोपों को तीव्र किया, जिससे करूर के नागरिकों को और भी उलझन में डाल दिया।

संभावित प्रभाव

इस विवाद ने तमिलनाडु की राजनीतिक धारा को फिर से विभाजित कर दिया है। यदि यह मामला न्यायिक या सार्वजनिक जांच के तहत आता है, तो यह दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक नतीजे लेकर आ सकता है। करूर की जनता को यह स्पष्ट नहीं है कि किसने सही समय पर सही कदम उठाया, और यह विवाद उस अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है।