लेह एपेक्स बॉडी ने दिल्ली यात्रा रद्द कर दी क्योंकि सनम वांगचुक ने 22‑ दिन की भूख हड़ताल नहीं तोड़ी। जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने लद्दाख को दी जा रही संवैधानिक सुरक्षा और जम्मू‑कश्मीर की राज्यता न दी जाने को दोहरी मानदंड कहा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सनम वांगचुक ने 22‑ दिन की भूख हड़ताल जारी रखी, लेह एपेक्स बॉडी ने दिल्ली यात्रा रद्द कर दी।
  • केंद्रीय सरकार ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद‑371 जैसा मॉडल तैयार करने का वादा किया, जबकि जम्मू‑कश्मीर की राज्यता को नकारा।
  • ओमर अब्दुल्ला ने भाजपा के एक कार्यकर्ता द्वारा NC के विधायक को 30 crore रुपये, मंत्री पद और राज्यता का प्रस्ताव देने का आरोप लगाया।

सनम वांगचुक ने जम्मू‑कश्मीर के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य के रूप में 22 दिन से भूख हड़ताल का समर्थन किया है। उनका हड़ताल मुख्य रूप से जंटार मंतर में हुई विरोध प्रदर्शनी से जुड़ा है, जिसमें केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पदत्याग की मांग की जा रही है, साथ ही नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा irregularities की जांच की माँग है।

लेह एपेक्स बॉडी की प्रतिक्रिया

लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के सह‑अध्यक्ष चेरिंग डोरजाय लक़रूक ने कहा कि वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी हड़ताल नहीं छोड़ेंगे। इस वजह से आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की दिल्ली यात्रा को स्थगित कर दिया गया, क्योंकि वार्ता के प्रमुख मोड़ पर उनका व्यक्तिगत सहयोग आवश्यक था।

लद्दाख बनाम जम्मू‑कश्मीर: संवैधानिक सुरक्षा का द्वंद्व

लद्दाख में दो प्रमुख गठबंधन—LAB और कर्गिल डेमोक्रेटिक एलायंस—राज्यता और छठे अनुसूची के संरक्षण की मांग कर रहे हैं। मई 22 को हुई एक बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद‑371 जैसा, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश‑स्तर के चुने हुए निकाय के अधिकारों को परिभाषित करने वाला मॉडल तैयार करने का संकेत दिया। वहीँ, जम्मू‑कश्मीर की राज्यता को पुनर्स्थापित करने की मांग पर केंद्र ने ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे ओमर अब्दुल्ला ने दोहरी मानदंड का आरोप लगाया।

ओमर अब्दुल्ला की तीखी आलोचना

सिंध में आयोजित रैली में राष्ट्रीय कांग्रेस के आगामी जंटार मंतर प्रदर्शनी से पहले, ओमर ने कहा, “जब लद्दाख को अनुच्छेद‑371 जैसा संरक्षण मिल रहा है, तो जम्मू‑कश्मीर को राज्यता क्यों नहीं दी जा रही?” उन्होंने यह भी उजागर किया कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ता ने राष्ट्रीय कांग्रेस के जम्मू के एक विधायक को 30 crore रुपये, एक मंत्री पद और राज्यता का वादा करके राजनैतिक समर्थन हासिल करने की कोशिश की।

भविष्य की दिशा

यदि केंद्र लद्दाख के लिए प्रस्तावित मॉडल को लागू करता है, तो यह भारत में संघीय संरचना के पुनः आकलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। वहीं, जम्मू‑कश्मीर की राज्यता को न मानने से राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। वांगचुक की भूख हड़ताल, ओमर की कड़ी आवाज़ और केंद्र की नीति‑निर्धारण के बीच की इस टकराव को देखना भारत के लोकतांत्रिक तंत्र के लिए एक निर्णायक परीक्षा बन सकता है।