सुप्रीम कोर्ट जज के.वी. विश्वनाथन ने कोयंबटूर के पोल्लाची में नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन पर कहा कि ट्रायल कोर्ट नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में न्याय व्यवस्था की मूलभूत रीढ़ हैं। उन्होंने बार एसोसिएशन से युवा वकीलों के मेंटरशिप को सुदृढ़ करने का आग्रह किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ट्रायल कोर्ट न्याय प्रणाली की मुख्य आधारशिला हैं
- नए पोल्लाची कोर्ट कॉम्प्लेक्स में 10 कोर्ट हॉल और आधुनिक सुविधाएँ
- जज ने बार एसोसिएशन को मेंटरशिप कार्यक्रम शुरू करने का आह्वान किया
कोयंबटूर के पोल्लाची में 11 जुलाई को हुए उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट जज के.वी. विश्वनाथन ने न्याय व्यवस्था के सबसे निचले स्तर—ट्रायल कोर्ट—को न्याय वितरण का “रीढ़” कहा। उनका मानना था कि अधिकांश नागरिकों के लिए ये ही प्रथम संपर्क बिंदु होते हैं, जिससे न्याय के प्रति भरोसा बनता है।
उद्घाटन समारोह और मुख्य वक्तव्य
समारोह में मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अर्विंद धर्माधिकारी और कई माननीय न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। जज विश्वनाथन ने कहा, “एक कोर्ट केवल ईंट‑पथर की इमारत नहीं, बल्कि वह संवैधानिक संस्था है जो सभी को यह आश्वासन देती है कि उनका अधिकार कानून के तहत सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने सभी बार एसोसोसिएशन से आग्रह किया कि वरिष्ठ वकीलों को युवा वकीलों के मार्गदर्शन हेतु संरचित मेंटरशिप कार्यक्रम स्थापित किया जाए।
नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स: बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ
पोल्लाची में स्थित यह संयुक्त कोर्ट कॉम्प्लेक्स 3.14 एकड़ पर फैला है और 40.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हुआ है। यह तीन मंजिला इमारत 1.84 लाख वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र में 10 अदालत हॉल, न्यायाधीशों के कमरों, कानूनी सहायता केंद्र, एक पुस्तकालय, 200 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, बार एसोसिएशन हॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और 100 कारों के लिए पार्किंग प्रदान करता है। राज्य सरकार ने अतिरिक्त 14.59 करोड़ रुपये फर्नीचर, दीवारें, पहुँच मार्ग और अन्य सुविधाओं के लिए आवंटित किए।
पिछले स्थितियों से तुलना
मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश धर्माधिकारी ने बताया कि पोल्लाची के पाँच मौजूदा कोर्ट—सब कोर्ट, प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट मुंसिफ कोर्ट, अतिरिक्त डिस्ट्रिक्ट मुंसिफ कोर्ट और दो न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट—पहले सब-कलेक्टर कार्यालय के भीड़भाड़ वाले परिसर में कार्यरत थे। नया कॉम्प्लेक्स न केवल स्थानिक भीड़ कम करेगा, बल्कि भविष्य की माँगों को पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीकी सुविधाएँ भी प्रदान करेगा। कोयंबटूर जिले में कुल 59 कोर्ट हैं, जिनमें से 47 समर्पित न्यायिक इमारतों में और 12 साझा सरकारी इमारतों में स्थित हैं; यह नया निर्माण एक और स्वतंत्र न्यायिक इमारत जोड़ता है।
भविष्य की दिशा और प्रभाव
ट्रायल कोर्ट की बुनियादी शक्ति को पहचानते हुए, इस तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश से न्याय की पहुँच में सुधार, केस बैक्लॉग में कमी और litigants एवं वकीलों के लिए कार्यकुशलता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समान मॉडल को अन्य जिलों में अपनाया जाए तो न्यायिक प्रणाली के समग्र प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार संभव है।