तमिलनाडु के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री र. विनोथ ने कहा कि राज्य के प्रत्येक ज़िले की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि बजट तैयार किया जाएगा। इस दिशा‑निर्देश को लागू करने के लिए दक्षिणी दस जिलों में किसान प्रतिनिधियों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित की गईं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • प्रत्येक जिले की विशेषताओं के अनुसार बजट बनाना
  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई योजनाएँ
  • प्राकृतिक खेती, संसाधन संरक्षण और मूल्य सुरक्षा पर फोकस

तमिलनाडु के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री र. विनोथ ने 11 जुलाई को त्रिनेलवेली में आयोजित परामर्श बैठक में कहा कि राज्य के प्रत्येक ज़िले के अलग‑अलग कृषि‑आर्थिक प्रोफ़ाइल को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया जाएगा, न कि एकसमान मॉडल अपनाया जाएगा। यह बयान 2026‑27 कृषि बजट की रूपरेखा तय करने के लिए दक्षिणी दस जिलों के किसानों को सुनने के बाद दिया गया।

परामर्श प्रक्रिया का विस्तार

त्रिनेलवेली, टेंकाशी, कन्याकुमारी, थूतुकुड़ी, विरुधनगर, रामनाथपुरम, शिवगंगा, मदुरै, थेनी और डिंडिगुल के किसानों ने इस बैठक में हिस्सा लिया। साथ ही पी. माथन राजा, जो छोटे‑मध्यम उद्यमों के मंत्री हैं, और कई कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। यह परामर्श श्रृंखला पहले वेल्लोर, सलेम और थंजावूर में भी आयोजित की गई थी, जिससे राज्य‑व्यापी डेटा एकत्रित किया जा सके।

मुख्य नीति दिशा‑निर्देश

मंत्री विनोथ ने बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने किसानों, कृषि संघों और अन्य हितधारकों से विस्तृत राय लेने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य है किसानों की आय में वृद्धि, निरंतर आर्थिक विकास, और जलवायु‑परिवर्तन के प्रति लचीलापन। बजट में गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट, एकीकृत खेती, संसाधन संरक्षण, प्राकृतिक खेती और उत्पाद मूल्य सुरक्षा को प्रमुखता दी जाएगी।

लक्ष्य और योजनाएँ

2026‑27 के लिए 1,31,36,000 मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पल्स सेल्फ‑सफ़िशिएंसी मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से खेती के क्षेत्र को विस्तारित करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और प्रौद्योगिकी अपनाने पर बल दिया जाएगा। साथ ही, फार्म मशीनरी के उपयोग को प्रोत्साहित करने, कोल्ड‑स्टोरेज एवं पोस्ट‑हार्वेस्ट बुनियादी ढाँचे को सुधारने के कदम उठाए जा रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि इस क्षेत्र‑विशिष्ट बजट मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया गया तो तमिलनाडु में कृषि उत्पादन की स्थिरता, किसान आय में वृद्धि और जलवायु‑सुरक्षित खेती के लिए एक नई दिशा स्थापित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल अन्य भारतीय राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर कृषि नीति में विविधता और लचीलापन आएगा।