तमिलनाडु ने चेंनई के MRTS को मेट्रो मानक तक पहुंचाने हेतु ₹6,600 करोड़ लागत वाले पुनर्जीवन प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से फंडिंग और ऋण सहायता का अनुरोध किया है। यह पहल MRTS को चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड के अधीन ले जाने और स्टेशन व ट्रेन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तमिलनाडु ने MRTS नवीनीकरण के लिए ₹6,600 करोड़ के प्रोजेक्ट को केंद्र‑सेंटर सेक्टर माना है।
  • प्री‑अभियान रिपोर्ट MoHUA को भेजी गई, आगे आर्थिक मामलों के विभाग से बाहरी फंडिंग की संभावना।
  • CMRL को संचालन सौंपने से यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा और राज्य की वित्तीय बोझ में कमी होगी।

तमिलनाडु सरकार ने चेंनई के मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) को चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) के मानकों तक लाने के लिए एक व्यापक पुनर्जीवन योजना प्रस्तुत की है और इस पर केंद्र सरकार से फंडिंग एवं ऋण सहायता की मांग की है। अनुमानित कुल खर्च लगभग ₹6,600 करोड़ है, जिसे राज्य ने ‘सेंट्रल सेक्टर’ प्रोजेक्ट के रूप में वर्गीकृत करने का प्रस्ताव रखा है।

पृष्ठभूमि

MRTS का निर्माण 1990 के दशक में हुआ था, लेकिन प्रारंभिक योजना के बाद से ही इसकी उपयोगिता अपेक्षाकृत कम रही है। कई सालों तक रखरखाव की कमी, सीमित ट्रेनिंग क्षमता और पुरानी स्टेशन सुविधाओं ने यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की ओर मोड़ दिया। 2025 में रेलवे बोर्ड ने CMRL को MRTS का संचालन सौंपने की स्वीकृति दे दी, परंतु यह प्रक्रिया अभी भी दक्षिणी रेलवे और राज्य सरकार के बीच समझौते (MoU) पर निर्भर है।

प्रस्ताव के प्रमुख पहलू

प्रस्तावित ‘MRTS पुनर्जीवन’ परियोजना में प्रमुख तीन स्तंभ हैं: (i) सभी स्टेशनों का आधुनिकीकरण, (ii) ट्रेन और सिग्नल सिस्टम का अपग्रेड, तथा (iii) संचालन को CMRL के तहत लाना। यदि इसे ‘सेंट्रल सेक्टर’ माना जाता है, तो इक्विटी भाग राज्य और केंद्र के बीच समान रूप से विभाजित होगा, जिससे बाहरी एजेंसियों से ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा। यह मॉडल राज्य की वित्तीय दबाव को कम कर, परियोजना की समयसीमा को तेज कर सकता है।

परिप्रेक्ष्य एवं प्रक्रिया

प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट पहले ही हाउसिंग और अर्बन अफेयर्स मंत्रालय (MoHUA) को भेजी जा चुकी है। MoHUA की स्वीकृति मिलने पर इसे आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) को अग्रेषित किया जाएगा, जहाँ बाहरी वित्तीय संस्थाओं से ऋण की संभावनाओं का अध्ययन होगा। साथ ही, रेलवे बोर्ड द्वारा MoU पर स्वीकृति मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए वर्तमान में तीन सप्ताह का समय अनुमानित किया गया है।

संभावित प्रभाव

यदि योजना सफल रहती है, तो MRTS को आधुनिक मेट्रो स्टैंडर्ड पर लाने से न केवल यात्रियों के यात्रा अनुभव में सुधार होगा, बल्कि शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इससे ट्रैफ़िक जाम में कमी, कार्बन उत्सर्जन में घटाव और आर्थिक गतिविधियों में गति आने की संभावना है। साथ ही, राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को भी समर्थन मिलेगा, क्योंकि बाहरी फंडिंग और केंद्र‑राज्य साझेदारी के माध्यम से बोझ विभाजित हो जाएगा।