बेंगलुरु के विजयनगर में निर्मित एसी बस शेल्टर को लेकर स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या यह परियोजना वास्तव में प्राथमिकता में है या केवल राजनैतिक दिखावा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विजयनगर में एसी बस शेल्टर बनाकर सार्वजनिक धन का उपयोग किया गया
  • स्थानीय लोग इसे प्राथमिकता नहीं मानते, मौजूदा सेवाओं को बेहतर बनाने की माँग
  • पहले के कई सिविक प्रोजेक्ट भी अपेक्षित लक्ष्य नहीं हासिल कर पाए

बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गोव्डा ने शहर भर में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने की पहल तेज़ की है, लेकिन विजयनगर में एसी बस शेल्टर बनवाने से जनता में गहरी असंतुष्टि उत्पन्न हुई है। यह शेल्टर बेंगलुरु वेस्ट सिटी कॉरपोरेशन द्वारा निर्मित किया गया है और जल्द ही उद्घाटन होने वाला है।

पृष्ठभूमि

विजयनगर के बस स्टॉप से बीएमटीसी की बसें महज पाँच मिनट के अंतराल में चलती हैं, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। फिर भी, एक एसी शेल्टर की लागत को देखते हुए कई नागरिकों ने इसे अनुचित खर्च बताकर सवाल उठाया।

विवाद का कारण

स्थानीय कार्यकर्ता बी.एच. विरीश और रामु टी. (महिति हक्कु अध्ययन केंद्र) के अनुसार, इस शेल्टर के निर्माण से वास्तविक आवश्यकताओं, जैसे कि ट्रैफिक सुरक्षा और फुटपाथ की साफ़-सफ़ाई, का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि शेल्टर के सामने दो अन्य सिविक परियोजनाएँ—पलिके बाजार का एसी अंडरग्राउंड मार्केट (लगभग ₹14 करोड़) और कई साल पुराना पेडेस्ट्री अंडरपास—अपनी मूल उद्देश्य में विफल रहे हैं।

वित्तीय प्रभाव

एसी शेल्टर की लागत, जिसमें निर्माण, एसी उपकरण और रखरखाव शामिल है, को सार्वजनिक कोष से उठाया गया था। आलोचकों का तर्क है कि यह रकम अधिक प्रभावी ढंग से ट्रैफिक जाम कम करने, फुटपाथ की सफ़ाई, या मौजूदा बसों की आवृत्ति बढ़ाने में लगाई जानी चाहिए थी।

जन प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

स्थानीय निवासियों ने कहा कि कई साल पहले बना पेडेस्ट्री अंडरपास अब भी कम उपयोग किया जाता है, क्योंकि लोग सतह पर ही सड़क पार करना पसंद करते हैं। इस तरह की परियोजनाओं में सार्वजनिक परामर्श की कमी स्पष्ट है, और भविष्य में अधिक पारदर्शी योजना प्रक्रिया की माँग की जा रही है।