कोलकाता हाई कोर्ट की राहत के एक दिन बाद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने ट्रिनामूल कांग्रेस के अतिरिक्त 12 बैंक खातों को फ्रीज किया, जिससे कुल अनुमानित 1,000 करोड़ रुपये बंधक हो गए। यह कदम पार्टी के वित्तीय विवाद को और जटिल बनाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पश्चिम बंगाल पुलिस ने 12 अतिरिक्त TMC खाते फ्रीज किए
- कुल बंधक राशि लगभग 1,000 करोड़ रुपये
- हाई कोर्ट ने 3 HDFC खातों को सीमित रूप से संचालन की अनुमति दी
कोलकाता – पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को ट्रिनामूल कांग्रेस (TMC) के 12 और बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, जिससे अब तक कुल 15 खातों में लगभग 1,000 करोड़ रुपये बंधक हो चुके हैं। यह कार्रवाई तब की गई, जब कल कोलकाता हाई कोर्ट ने पार्टी को तीन HDFC खातों को आंशिक रूप से चलाने की अनुमति दी थी, जिनमें अनुमानित 440 करोड़ रुपये की राशि थी।
पृष्ठभूमि और कानूनी परिप्रेक्ष्य
हाई कोर्ट के आदेश के तहत, एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रता तलुकार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया, जो 30 सितंबर तक पार्टी के दैनिक प्रशासनिक खर्च, स्टाफ वेतन और कानूनी लागतों के लिए फंड का उपयोग कर सकते हैं। इस विशेष अधिकारी को पार्टी के फंड से प्रति माह 1.25 लाख रुपये का मानदेय भी दिया गया।
एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की भूमिका
हालाँकि कोर्ट ने कुछ खाते खोलने की अनुमति दी, लेकिन एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने उन ही तीन खातों को मनी लॉन्डरिंग (PMLA) के तहत फ्रीज कर रखा है। ED ने 160 करोड़ रुपये की संभावित धनशोधन मामले की जांच में इन खातों को बंद किया है, जिसमें एक निजी एवीएशन फर्म और एक एम्ब्रेयर बिजनेस जेट तथा अगुस्ता हेलिकॉप्टर की खरीद शामिल है।
आंतरिक पार्टी विवाद और पुलिस कार्रवाई
TMC के भीतर चुनावी हार के बाद, कई विधायक और नेता पार्टी के भीतर “गंभीर विवाद” का हवाला देते हुए खातों को फ्रीज करवाने की मांग की। उन्होंने बिड़ननगर पुलिस के साइबरक्राइम यूनिट को फंड स्रोत की जांच का आदेश दिया, जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की।
भविष्य की संभावनाएँ
पार्टी ने हाई कोर्ट में ED के आदेश को चुनौती दी है, और वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता ने सोमवार को न्यायाधीश कृष्णा राव के समक्ष त्वरित सुनवाई की मांग की है। यदि कोर्ट ED के फ्रीज को हटाने का आदेश देता है, तो TMC को अपनी वित्तीय स्थिति को पुनर्स्थापित करने में मदद मिल सकती है, परंतु अभी तक कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखी है।
यह विकास न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति को बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी वित्तीय नियमन और राजनीतिक वित्तपोषण के मुद्दों को उजागर करता है।