बिदाड़ी के तीन गाँवों में ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) परियोजना के लिए ज़मीनी अधिग्रहण पर ग्रेटर बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (GBDA) ने 90% किसान सहमति का दावा किया है, जबकि स्थानीय किसान इस आँकड़े को हेरफेर मानते हुए विरोध कर रहे हैं। विवाद के बीच ₹150 करोड़ की क्षतिपूर्ति जारी की गई है, पर प्रक्रिया में देरी की शिकायतें बढ़ रही हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • GBDA ने बिदाड़ी टाउनशिप में 90% किसान सहमति का दावा किया।
  • किसानों ने डेटा में हेरफेर और सहमति प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया।
  • अब तक ₹150 करोड़ की क्षतिपूर्ति जारी की गई, पर कई किसान तेज़ भुगतान की मांग कर रहे हैं।

ग्रेटर बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (GBDA) ने बिदाड़ी के तीन गाँव – केम्पाय्यनापाल्या, मंदालहली और वडेरहली – में 519 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए अंतिम अधिसूचना जारी की। इस परियोजना के तहत कुल 9,640 एकड़ भूमि, जिसमें 7,200 एकड़ कृषि भूमि शामिल है, को एकीकृत टाउनशिप के रूप में विकसित करने की योजना है। GBDA के आंकड़ों के अनुसार, केम्पाय्यनापाल्या में 357 में से 367 भूमि मालिकों ने, मंदालहली में 23 में से 26, और वडेरहली में 53 में से 63 ने अपनी जमीन छोड़ने के लिए सहमति दी।

किसानों का विरोध और डेटा पर सवाल

हालाँकि, मंदालहली के एक जमीन मालिक नागराजु एम.आर. ने इन आँकड़ों को “हेरफेर” कहा और अपने परिवार के 36 एकड़ भूमि के मालिक होने के बावजूद कोई भी सहमति नहीं दी होने का दावा किया। उन्होंने बताया कि गाँव में 60% से अधिक जमीन सात प्रमुख परिवारों के पास है, जिन्होंने अभी तक सहमति नहीं दी है, फिर भी GBDA ने 80% सहमति का आंकड़ा प्रस्तुत किया। कर्नाटक प्रांथा रैथा संघ (KPRS) के राज्य महा सचिव यशवंत टी. ने कहा कि अधिकारी इस डेटा को विरोधियों के मनोबल को तोड़ने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें कुछ किसानों को स्थानीय विधायक के माध्यम से प्रारंभिक चेक वितरण भी शामिल है।

GBDA की प्रतिक्रिया और क्षतिपूर्ति प्रक्रिया

एक वरिष्ठ GBDA अधिकारी ने कहा कि कई किसान मौन में हैं क्योंकि वे अभी भी क्षतिपूर्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक ₹150 करोड़ की राशि 92 व्यक्तियों को नकद, 25 को जमीन और 10 को मिश्रित रूप में वितरित कर दी गई है। साथ ही फसल और पेड़ों के लिए भी मुआवजा दिया जा रहा है, जैसा कि शांथम्मा और वेंकटेश जैसे किसानों को उनके 3.20 एकड़ खेत के लिए ₹1.26 करोड़ की रक़म दी गई है।

भविष्य की दिशा और संभावित प्रभाव

परियोजना के समर्थन में कई व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर हैं, जो नई टाउनशिप के शहरीकरण से संभावित लाभ देख रहे हैं। दूसरी ओर, यदि किसान विरोध जारी रहता है, तो यह न केवल परियोजना की समयसीमा को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य सरकार के भूमि अधिग्रहण नीति पर भी प्रश्न उठाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी दस्तावेज़ीकरण और शीघ्र क्षतिपूर्ति ही इस प्रकार के बड़े विकास प्रोजेक्ट में विश्वास को पुनर्स्थापित कर सकती है।