जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने बीजेडपी पर अपने एमएलए को 20‑30 करोड़ रुपये की पेशकश कर पार्टी को तोड़ने का आरोप लगाया। बीजेडपी ने इसे निराधार कहा, सबूत या माफी की माँग की और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ओमर अब्दुल्ला ने बीजेडपी पर एमएलए को 20‑30 करोड़ रुपये की पेशकश का आरोप लगाया।
- बीजेडपी ने आरोप को निराधार कहा, प्रमाण या माफी की मांग की।
- बीजेडपी ने अभद्र बयान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने रविवार को बीजेडपी (भारतीय जनता पार्टी) पर राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसी) के विधायकयों को पैसे देकर सरकार को गिराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ विधायक 20 से 30 करोड़ रुपये की पेशकश के बाद बीजेडपी के पक्ष में बदलने को तैयार हुए थे। यह बयान 26 जुलाई को उनके दादा‑दादी के मकबरे पर आयोजित शहीदी स्मरण सभा के दौरान दिया गया था।
बीजेडपी का तीखा जवाब
बीजेडपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संभित पाट्रा ने इस आरोप को “स्पेकुलेटिव और बिना किसी आधार के” कहा। पाट्रा ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाले किसी भी कार्य में पार्टी का हाथ नहीं है और ऐसी बातों से पार्टी की साख को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने ओमर अब्दुल्ला को “अपने पार्टी के भीतर के नेताओं के बारे में आत्मनिरीक्षण” करने का आग्रह किया।
भारी शब्दों में बहस का विस्तार
बीजेडपी के राजसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस आरोप को “अत्यधिक गैर‑जिम्मेदार और निराधार” करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि अभदुल्ला के पास कोई साक्ष्य है तो वह तुरंत प्रस्तुत करें, अन्यथा सार्वजनिक माफी दें। जम्मू‑कश्मीर बीजेडपी प्रवक्ता एवं विधायक आर.एस. पथानिया ने बताया कि यदि माफी नहीं दी गई तो बीजेडपी “डिफेमेशन केस” दाखिल करेगा।
राजनीतिक परिदृश्य और संभावित प्रभाव
यह विवाद दो प्रमुख कारकों को उजागर करता है: पहला, जम्मू‑कश्मीर में राष्ट्रीय सम्मेलन की घटती लोकप्रियता और दूसरी ओर, बीजेडपी की राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप अक्सर सरकार की नीति‑निर्माण में विफलता या असंतोष को छुपाने के लिए किए जाते हैं। अगर साक्ष्य नहीं मिला तो यह मामला ओमर अब्दुल्ला की राजनीतिक वैधता को कमजोर कर सकता है, जबकि बीजेडपी को अपने अनुयायियों में दृढ़ता दिखाने का अवसर मिलेगा।
भविष्य की दिशा
अब मामला न्यायालय या जांच एजेंसियों के हाथों में है। यदि किसी विधायक को वास्तविक रूप में पैसे की पेशकश की गई हो, तो यह भारतीय चुनावी कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। दूसरी ओर, यदि यह आरोप निराधार सिद्ध होता है, तो ओमर अब्दुल्ला को सार्वजनिक माफी देना पड़ेगा और संभावित दावे‑प्रतिदावे के लिए तैयार रहना पड़ेगा।