बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के बड़े MHADA लेआउट्स के एकीकृत पुनर्विकास को मंजूरी दी, जिससे लाखों परिवारों के रहने की स्थिति और शहर की बुनियादी ढाँचा बदल सकता है। यह फैसला बंदरा‑वोर्ली जैसी बहु‑अरब करोड़ मूल्य वाली परियोजनाओं को भी प्रभावित करेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • MHADA क्लस्टर पुनर्विकास के लिए हाई कोर्ट ने एकीकृत योजना को प्राथमिकता दी
  • बंदरा‑वोर्ली परियोजनाओं का मूल्य ₹37,000 करोड़ से अधिक
  • निर्णय भविष्य में लाखों परिवारों के घरों को प्रभावित करेगा

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में एक निर्णायक आदेश दिया, जिसमें मुंबई के सबसे बड़े MHADA लेआउट्स के एकीकृत (क्लस्टर) पुनर्विकास को प्राथमिकता दी गई। यह निर्णय, विशेषकर बंदरा‑वोर्ली पुनर्विकास परियोजनाओं, को लागू करने के लिए एक कानूनी ढाँचा स्थापित करता है, जो अब तक के टेंडर प्रक्रिया और राज्य की नीतियों को सुदृढ़ करता है।

पृष्ठभूमि

MHADA (महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी) ने 1950‑1960 के दशक में मध्य‑आय वर्ग (MIG) और निम्न‑आय वर्ग (LIG) के लिए किफ़ायती आवास तैयार किया। समय के साथ इन इमारतों में गिरावट आई और कई सोसाइटीज़ को अलग‑अलग पुनःनिर्माण के लिये दबाव का सामना करना पड़ा। 2024‑2025 में राज्य ने 20 एकड़ या अधिक के लेआउट्स के लिए क्लस्टर पुनर्विकास की नीति पेश की, जिससे एक ही निजी निर्माण‑डिज़ाइन (C&D) एजेंसी को संपूर्ण लेआउट के लिए चयन किया जा सके।

अदालत का तर्क

जस्टिस मक़रंद एस करनिक और शरिराम एम मोडक की बेंच ने 2 जुलाई को सोसाइटीज़ के विरोध को खारिज किया। उन्होंने कहा कि "MHADA‑नेतृत्व वाला पुनर्विकास, लेआउट के आकार, इमारतों की उम्र, सार्वजनिक आवास‑नीति और एकीकृत योजना की आवश्यकता को देखते हुए उचित है"। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि एकीकृत पुनर्विकास से सड़कों, जल‑सिंचाई और सार्वजनिक सुविधाओं की योजना व्यापक दृष्टिकोण से की जा सकती है, जबकि टुकड़े‑टुकड़े पुनःनिर्माण से टकराव और असंगत विकास की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

हितधारकों पर प्रभाव

निर्णय से हजारों परिवारों को दो‑गुना पुनर्वास क्षेत्र मिलने की आशा है, जबकि सोसाइटीज़ को 51% सहमति के आधार पर विकासकर्ता को चुनने का अधिकार मिला है। तथापि, यह नीति व्यक्तिगत मालिकों के अधिकारों को सीमित करती है, जिससे भविष्य में संभावित कानूनी चुनौतियों की संभावना बनी रहती है। निजी डेवलपरों को बड़े पैमाने पर निवेश करने का अवसर मिलता है, जो मुंबई के जल‑जमाव जैसी दीर्घकालिक समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है।

भविष्य की दिशा

बंदरा‑वोर्ली के साथ मोटिलाल नगर, अभ्युदय नगर जैसे अन्य बड़े लेआउट्स भी इस नीति के तहत पुनर्विकास की राह पर हैं। यदि इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया, तो यह मुंबई के शहरी विकास मॉडल में एक मौलिक परिवर्तन का संकेत देगा, जहाँ क्लस्टर‑आधारित योजना को प्राथमिकता दी जाएगी। यह न केवल शहर के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करेगा, बल्कि किफ़ायती आवास की उपलब्धता को भी स्थायी बनाएगा।