हाउसिंग और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खटर ने बताया कि राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैला केन्द्रीय विंडो अब 'कर्तव्य भवन क्षेत्र' के रूप में पुनःनामित होना चाहिए। यह प्रस्ताव नई सचिवालय इमारतों के साथ शहर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केन्द्रीय विंडो को 'कर्तव्य भवन क्षेत्र' नाम दिया जाएगा
  • नए सचिवालय भवनों को कर्तव्य भवन 1, 2, 3 के रूप में नामित किया गया
  • राजपथ को 'कर्तव्य पथ' में बदला गया

नई दिल्ली – हाउसिंग और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खटर ने 13 जुलाई को केंद्रीय सार्वजनिक कार्य विभाग (CPWD) की 172वीं स्थापना दिवस समारोह में एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि आज तक जिस क्षेत्र को ‘केन्द्रीय विंडो’ कहा जाता रहा, वह अब आधिकारिक तौर पर ‘कर्तव्य भवन क्षेत्र’ के रूप में जाना जाएगा। यह नाम परिवर्तन नई सचिवालय इमारतों के समुच्चय को सम्मानित करने के लिए किया गया है, जो देश के प्रशासनिक केंद्र को पुनः परिभाषित करेगा।

इतिहास में पुनरावर्तित नामकरण की परंपरा

भारत के स्वतंत्रता के बाद कई ब्रिटिश‑कालीन इमारतों का नाम बदलकर राष्ट्रीय पहचान दी गई – जैसे कि ‘वाइस‑रेगल लॉज’ को ‘राष्ट्रपति भवन’ और ‘काउंसिल हाउस’ को ‘संसद भवन’ कहा गया। मनोहर लाल ने इस ऐतिहासिक प्रथा को दोहराते हुए कहा, “जैसे हमारे पूर्वजों ने अपने अधिकारों को पुनःस्थापित किया, वैसा ही अब हमें इस क्षेत्र को कर्तव्य भवन क्षेत्र के रूप में मान्यता देनी चाहिए।” यह बयान इस बात को उजागर करता है कि सरकार अपने शहरी पुनरुद्धार परियोजनाओं में न केवल भौतिक संरचना बल्कि प्रतीकात्मक अर्थ भी जोड़ना चाहती है।

नवीनतम सचिवालय परियोजना

केन्द्रीय विंडो के पुनर्विकास में कुल दस नई सचिवालय इमारतें शामिल हैं। अब तक तीन इमारतें पूरी कर ‘कर्तव्य भवन 1, 2 और 3’ के रूप में नामित की जा चुकी हैं। साथ ही राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’ में बदल दिया गया, जिससे इस ऐतिहासिक मार्ग को नई पहचान मिली। इस पुनर्निर्माण का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना, सार्वजनिक स्थानों को आधुनिक बनाना और पर्यावरणीय मानकों को पूरा करना है।

पारदर्शिता और स्थानांतरण नीति

मंत्रालय ने नई स्थानांतरण नीति पर भी प्रकाश डाला, जिसमें अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों या राजनेताओं से संदर्भ (सिफारिश) लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी। इस नीति से 30 साल तक एक ही जगह पर कार्यरत अधिकारियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। जबकि कुछ को नई स्वतंत्रता का स्वागत है, तो अन्य पुरानी व्यवस्था के अभाव को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। मंत्री ने कहा, “स्थानांतरण प्रक्रिया अभी जारी है, अगले वर्ष भी परिवर्तन संभव हैं।” यह बयान प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है।

भविष्य की दृष्टि

‘कर्तव्य भवन क्षेत्र’ का नामकरण न केवल एक प्रतीकात्मक कदम है, बल्कि यह शहरी योजना, सार्वजनिक सहभागिता और राष्ट्रीय पहचान के पुनःनिर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े‑स्तर के पुनर्निर्माण में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों को संतुलित करना आवश्यक होगा, ताकि नई इमारतें केवल प्रशासनिक केंद्र ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन के केंद्र बन सकें।