त्रिनामूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रबिंद्रनाथ घोष ने रिताब्रता बैनर्जी के विद्रोही समूह में शामिल होकर अभिषेक बैनर्जी को राजनीतिक मंच से हटाने की मांग की। इस कदम से पार्टी में मौजूदा विभाजन और गहरा हो गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रबिंद्रनाथ घोष ने विद्रोही समूह में शामिल होकर अभिषेक बैनर्जी को हटाने की मांग की
  • विद्रोहियों ने राज्य‑स्तर और ज़िला‑स्तर पर समानांतर कमेटी स्थापित कर पार्टी को दो भागों में बाँटा
  • भविष्य में पश्चिम बंगाल की राजनैतिक स्थिरता और चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर पड़ सकता है

कोचबिहार, 12 जुलाई—त्रिनामूल कांग्रेस (टीएमसी) के दीर्घकालिक नेता रबिंद्रनाथ घोष ने रिताब्रता बैनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही समूह में आधिकारिक रूप से शिरकत की, और माँता बैनर्जी से आग्रह किया कि वह अपने भतीजे अभिषेक बैनर्जी को अस्थायी रूप से राजनीति से बाहर कर दे। यह घोषणा पार्टी के भीतर पहले से ही बढ़ते विभाजन को नई तीव्रता प्रदान करती है।

पृष्ठभूमि और विकास

घोष, पूर्व उत्तर बंगाल विकास मंत्री और माँता बैनर्जी के करीबी सहयोगी, अब संभावित तौर पर विद्रोही समूह के कोचबिहार ज़िला अध्यक्ष बनेंगे। उनका यह कदम केवल व्यक्तिगत असंतोष नहीं, बल्कि पिछले 24 घंटों में विद्रोहियों द्वारा समानांतर राज्य और ज़िला कमेटियों की घोषणा के बाद आया, जिससे पार्टी के दोहरे ढाँचे की नींव पक्की हुई। इस प्रक्रिया में पूर्व बिरभूम दिग्गज अनुब्रता मोण्डाल जैसे कई वरिष्ठ नेता भी समूह में शामिल हो चुके हैं।

अभिषेक बैनर्जी और I‑PAC पर आरोप

घोष ने अभिषेक बैनर्जी तथा उनके राजनीतिक सलाहकार फर्म I‑PAC को टीएमसी की विधानसभा चुनावी हार का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा, “अभिषेक के निर्णयों ने 80 से अधिक मौजूदा विधायक और मंत्रियों के टिकट रद्द करवा दिए, जिससे पार्टी के भीतर गहरी असंतुष्टि उत्पन्न हुई।” साथ ही उन्होंने माँता बैनर्जी के नेतृत्व पर प्रश्न उठाते हुए कहा, “अब दिदी के हाथ में शक्ति कम हो गई है, क्योंकि जिम्मेदारी असमर्थ लोगों को दे दी गई है।”

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

टीएमसी का यह विभाजन न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिरता को चुनौती देता है, बल्कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनौतियों में भी असर डाल सकता है। यदि विद्रोही समूह राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर लेता है, तो यह बैनर्जी परिवार की राजनैतिक शक्ति को काफी हद तक कम कर सकता है। विपक्षी दल, विशेषकर भाजपा, ने इस स्थिति का अपना लाभ उठाने की कोशिश की है, जैसा कि केंद्रीय मंत्री सुकंता मजुमदार ने कहा, “दोनों नावें डूब रही हैं, चाहे कौन सवारी करे।”

भविष्य की संभावनाएँ

आगे देखते हुए, विद्रोहियों की रणनीति यह है कि वे टीएमसी का एक वैकल्पिक प्रतीक, नाम और फंड के लिए निर्वाचन आयोग में मान्यता प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। यदि सफल होते हैं, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में दो प्रतिद्वंद्वी टीएमसी समूहों के बीच सख्त प्रतिस्पर्धा देखी जा सकती है, जिससे मतदाताओं की पसंद में जटिलता बढ़ेगी।