उत्तarakhand सरकार ने बड़िनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के CEO को वित्तीय अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। विशेष जांच टीम ने दान चोरी के मामले में CCTV वीडियो और गवाहों के बयान एकत्र किए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बड़िनाथ मंदिर में दान चोरी के आरोपों पर सरकारी जांच तेज़
- CCTV फुटेज में प्रामोद नौटियाल को संदिग्ध रूप से धन ले जाते दिखाया गया
- BKTC को तीन साल के बैंक रिकॉर्ड जमा करने और आंतरिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश
उत्तarakhand सरकार ने बड़िनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को निर्देशित किया है कि वह उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करे, जिन पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। यह कदम 25 जून को जारी किए गए एक पत्र के बाद आया, जिसमें पर्यटन एवं धार्मिक मामलों के विभाग के उप सचिव अनिल कुमार पांडे ने एक जांच रिपोर्ट का हवाला दिया।
जांच रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष
रिपोर्ट में यह पाया गया कि मंदिर कोष से बिना उचित अनुमोदन के अग्रिम राशि जारी की गई, जिससे वित्तीय अनियमितता सिद्ध हुई। इस रिपोर्ट ने केदारनाथ के तब के मैनेजर, मुख्य इंचार्ज अधिकारी और CEO को प्रश्नवाचक बनाया। सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्री बड़िनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उचित अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएँ।
धन चोरी के आरोप और CCTV सबूत
एक समानांतर जांच में विशेष जांच टीम (SIT) ने बड़िनाथ मंदिर में दान चोरी के मामलों में पाँच गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए। पुलिस ने बताया कि 2 जुलाई की CCTV फुटेज में निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को दान गिनती कक्ष से नकद, सोने-चांदी के सिक्के, शालिग्राम पत्थर और दान के लिफाफे को संदेहास्पद रूप से ले जाते हुए दिखाया गया है। फुटेज में नौटियाल को कक्ष और अपने कार्यालय के बीच कई बार यात्रा करते हुए भी दर्शाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह चोरी किए गए वस्तुओं को अपने कार्यालय में छिपा रहा था।
आगे की कार्यवाही और कानूनी पहलू
उत्तarakhand पुलिस ने बताया कि BKTC को पिछले तीन वर्षों के बैंक रिकॉर्ड जमा करने हैं और आंतरिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। साथ ही, प्रमोद नौटियाल ने अपने निलंबन और FIR को चुनौती देते हुए उत्तराखण्ड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें न्यायाधीश अलोक मेहरा ने BKTC को जवाब देना आदेशित किया। अगली सुनवाई 16 जुलाई निर्धारित है।
समग्र परिप्रेक्ष्य
बड़िनाथ मंदिर भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। इस प्रकार के बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटालों से न केवल धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं, बल्कि राज्य सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की क्षमता भी परखा जाता है। इस मामले में कई जांच एजेंसियों—पुलिस, SIT, BKTC की विभागीय जांच समिति और गढ़वाल आयुक्त द्वारा संचालित उच्च स्तर की समिति—की भागीदारी यह संकेत देती है कि उत्तराखण्ड प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है।