केरल में बीजेपी राज्य अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कांग्रेस‑नेतृत्व वाले कर्नाटक सरकार को किसानों की समस्याओं की अनदेखी और रियल एस्टेट परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह नीति बिदाड़ी टाउनशिप और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के विरोध को उत्पन्न कर रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांग्रेस‑शासन को रियल एस्टेट को प्राथमिकता देने का आरोप
- किसानों का विरोध बिदाड़ी टाउनशिप और अन्य योजनाओं पर
- ड्राउट राहत और कृषि मंत्रालय की अनुपस्थिति पर सवाल
कर्नाटक के क़लाबुरगी में बी.वाई. विजयेंद्र, बीजेपी राज्य अध्यक्ष, ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस‑नेतृत्व वाले राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार अधिकतर बेंगलुरु के रियल एस्टेट विकास पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि किसानों की बुनियादी वकालत को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
किसानों का विरोध और बिदाड़ी टाउनशिप
विजयेंद्र ने बिदाड़ी टाउनशिप परियोजना को उदाहरण के रूप में उठाते हुए कहा कि किसानों ने इस योजना के खिलाफ कड़ी आवाज़ उठाई है। भूमि सर्वेक्षण के दौरान अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा, जो सरकार की नीतियों में गहरी असंतोष का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि उत्तर कर्नाटक, विशेषकर कालयाण कर्नाटक क्षेत्र, को आर्थिक विकास के मानचित्र से बाहर रखा जा रहा है, जबकि बेंगलुरु को राज्य की सफलता का एकमात्र प्रतीक माना जा रहा है।
ड्राउट संकट और कृषि मंत्रालय की अनुपस्थिति
विजयेंद्र ने कहा कि राज्य वर्तमान में इतिहास के सबसे खराब ड्राउट में से एक का सामना कर रहा है, फिर भी कृषि मंत्रालय का कोई प्रमुख नहीं नियुक्त किया गया है। यह कदम सरकार की गंभीरता की कमी को उजागर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार चुनाव आयोग की मतदाता सूची में संशोधन के दौरान अवैध प्रवासियों को वोट दिलाने के लिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र (PRC) जारी करने की कोशिश कर रही है।
राज्य के अन्य नेताओं पर भी प्रश्न
हाउसिंग और शहरी विकास मंत्रालय तथा क़लाबुरगी जिलाधिकारी प्रियांक खरगे को भी विजयेंद्र ने निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि खरगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्थानीय समस्याओं, विशेषकर ड्राउट राहत और स्वास्थ्य सुविधाओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूल के छात्रों के संदिग्ध खाद्य विषाक्तता के बाद भी जिले में उनकी सक्रियता कम दिखी।
भविष्य की रणनीति
जब पत्रकारों ने पूछा कि विपक्षी दल किसानों के मुद्दों को उठाने के लिए क्या कदम उठा रहा है, तो विजयेंद्र ने उत्तर नहीं दिया और साक्षात्कार समाप्त कर दिया। यह संकेत देता है कि बीजेपी अपनी रणनीति को अभी भी गुप्त रख रही है, जबकि किसानों की असंतोष की लहरें तेज़ी से बढ़ रही हैं।