कांग्रेस नेता एस. राजेश ने म्यूरू दशहरा समारोह में कंबला को शामिल करने की मांग की, इसे केवल तुलु नाडु का खेल नहीं बल्कि तटीय क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर बताया। उन्होंने इस पहल को राजनीतिक विभाजन के विरुद्ध एकजुटता का संदेश कहा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कंबला को म्यूरू दशहरा में शामिल करने की कांग्रेस की मांग।
- कंबला को तटीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा और राष्ट्रीय एकता का माध्यम माना गया।
- राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दावेदारी का साधन बनाना।
म्यूरू, 13 जुलाई 2026 – कांग्रेस नेता एस. राजेश ने म्यूरू दशहरा समारोह में कंबला को शामिल करने की दृढ़ समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कंबला केवल तुलु नाडु का खेल नहीं, बल्कि कर्नाटक के तटीय क्षेत्र की जीवनशैली, परम्परा और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक है।
कंबला का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व
कंबला, जो दक्षिण कर्नाटक के दक्शिणा कन्नड़ और उदुपी जिलों में किसान समुदाय द्वारा आयोजित की जाने वाली भैंस दौड़ है, सदियों से स्थानीय पहचान का अभिन्न भाग रहा है। यह खेल जल-आधारित ट्रैक पर आयोजित होता है, जहाँ प्रशिक्षित भैंसें तेज़ी से दौड़ती हैं, जबकि जॉकीस अपने कौशल से उन्हें नियंत्रित करते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से यह खेल सतत कृषि का समर्थन करता है और पेड़-काटने जैसे किसी भी हानिकारक गतिविधि से दूर रहता है।
दशहरा में कंबला को क्यों नहीं छोड़ा जाना चाहिए
राजेश ने कहा, “म्यूरू दशहरा, जो राज्य का प्रमुख त्यौहार है, विभिन्न राज्यों की कला‑संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियों को मंच देता है। यदि कर्नाटक की कला‑संस्कृति को मंच मिलता है, तो कंबला जैसे पारम्परिक खेल को भी समान अवसर मिलना चाहिए।” उन्होंने उल्लेख किया कि कर्नाटक के पूर्व शासक नालवाड़ी कृष्णराजा वडियार ने भी कंबला को प्रोत्साहित किया था, जिससे इसका राजकीय मान्यता स्पष्ट होती है।
राजनीतिक परिपेक्ष्य
दशहरा में कंबला को शामिल करने के निर्णय को लेकर राज्य सरकार की नीति पर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं। राजेश ने इसे “राजनीतिक बदले की भावना” कहा, यह आरोप लगाते हुए कि भाजपा के नेता कर्नाटक में कांग्रेस की लोकप्रियता को घटाने के लिए इस खेल को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “भूभागीय विभाजन, भाषा‑सांस्कृतिक विभाजन की नीति को हम कड़ाई से निंदा करते हैं। यह कर्नाटक को बाँटने की कोशिश है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।”
भविष्य की दिशा
कांग्रेस का लक्ष्य कंबला को केवल कर्नाटक के तटीय क्षेत्र तक सीमित न रखकर, उसे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर परिचित कराना है। राजेश ने कहा, “हम युवा पीढ़ी को इस खेल की तकनीकी और साहसिकता से परिचित कराना चाहते हैं, जिससे यह भविष्य की पीढ़ियों में भी जीवित रहे।” इस दृष्टिकोण से कंबला को पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक रूप से एक सशक्त सांस्कृतिक संपदा माना गया है।