कर्नाटक के येलहंका से भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ एक कुख्यात अपराधी 'किंग मेकर' दास के जन्मदिन समारोह में शामिल हुए, जिसके बाद राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर इस जश्न की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ बेंगलुरु के येलहंका निर्वाचन क्षेत्र के आलूर में एक कुख्यात अपराधी 'किंग मेकर' दास के जन्मदिन समारोह में शामिल हुए।
- अपराधी 'दास' ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस भव्य समारोह की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिससे विवाद भड़क उठा।
- इस घटना ने कर्नाटक में राजनीति और अपराध के गठजोड़ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर राजनेताओं और अपराधियों के बीच कथित गठजोड़ को लेकर बहस छिड़ गई है। बेंगलुरु के येलहंका निर्वाचन क्षेत्र के आलूर में आयोजित एक भव्य जन्मदिन समारोह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमों के नेताओं की संलिप्तता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इस विवाद के केंद्र में भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ (SR Vishwanath) हैं, जिन्हें एक कुख्यात अपराधी के साथ मंच साझा करते देखा गया।
कौन है 'किंग मेकर' दास?
समारोह का मुख्य आकर्षण 'किंग मेकर' दास नाम का एक स्थानीय अपराधी था, जिसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही जा रही है। दास ने अपने सोशल मीडिया हैंडल, विशेष रूप से इंस्टाग्राम पर, इस भव्य पार्टी की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। इन तस्वीरों में भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ और कई अन्य स्थानीय भाजपा नेता उस अपराधी को केक खिलाते और बधाई देते नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
इस घटना के सामने आने के बाद कर्नाटक कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नेताओं का अपराधियों के साथ गहरा संबंध है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है। वहीं, भाजपा समर्थकों का तर्क है कि सार्वजनिक जीवन में होने के नाते विधायकों को कई सामाजिक कार्यक्रमों में जाना पड़ता है और उन्हें हमेशा आयोजकों की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी नहीं होती।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में किसी बड़े राजनेता को किसी संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के साथ देखा गया हो। पिछले कुछ वर्षों में, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं पर अपराधियों को संरक्षण देने या उनके साथ मंच साझा करने के आरोप लगते रहे हैं। इस तरह की घटनाएं अक्सर पुलिस प्रशासन और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान लगाती हैं, खासकर तब जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई हो।