टीडीपी पोलित ब्यूरो के सदस्य नक्का आनंद बाबू ने विपक्षी दल वाईएसआरसीपी पर अमरावती राजधानी परियोजना के विकास को रोकने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि वाईएसआरसीपी केवल 0.5% असंतुष्ट किसानों का इस्तेमाल कर राजनीतिक रोटियां सेक रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- टीडीपी नेता नक्का आनंद बाबू ने वाईएसआरसीपी पर अमरावती के विकास को बाधित करने की साजिश का आरोप लगाया।
- 99.50% किसानों ने स्वेच्छा से भूमि पूलिंग योजना के तहत राजधानी निर्माण के लिए अपनी जमीनें दी थीं।
- विपक्ष पर केवल 0.50% असंतुष्ट किसानों को राजनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप है।
आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती को लेकर राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के पोलित ब्यूरो सदस्य नक्का आनंद बाबू ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर तीखा हमला बोला है। मंगलगिरी स्थित टीडीपी केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी अमरावती के विकास को रोकने के लिए एक बार फिर बड़ी साजिश रच रहे हैं।
भूमि पूलिंग और असंतोष का सच
आनंद बाबू ने भूमि पूलिंग योजना (Land Pooling Scheme) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अमरावती के लगभग 99.50% किसानों ने स्वेच्छा से राजधानी निर्माण के लिए अपनी जमीनें दी थीं। केवल 0.50% किसान ही कुछ स्थानीय मुद्दों, विशेष रूप से सड़क कनेक्टिविटी को लेकर असंतुष्ट हैं। टीडीपी नेता का आरोप है कि वाईएसआरसीपी इसी छोटे से धड़े को भड़काकर विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने का प्रयास कर रही है, ताकि राजधानी के विकास को फिर से पटरी से उतारा जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक गतिरोध
इस विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 2014 से 2019 के बीच तत्कालीन टीडीपी सरकार ने अमरावती को एक वैश्विक स्तर की स्मार्ट सिटी बनाने की नींव रखी थी। हालांकि, 2019 में सत्ता परिवर्तन के बाद वाईएसआरसीपी सरकार ने 'तीन राजधानियों' का फॉर्मूला पेश किया, जिससे अमरावती का विकास पूरी तरह ठप हो गया। अब टीडीपी-जेएसपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने संसद द्वारा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में संशोधन करवाकर इस परियोजना को कानूनी वैधता प्रदान की है, जिससे वाईएसआरसीपी में बौखलाहट साफ देखी जा सकती है।
अमरावती का भविष्य और राजनीतिक निहितार्थ
अमरावती केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह आंध्र प्रदेश की राजनीतिक पहचान और आर्थिक भविष्य का प्रतीक बन चुकी है। टीडीपी जहां इसे विकास और निवेश के मुख्य केंद्र के रूप में पेश कर रही है, वहीं वाईएसआरसीपी का विरोध इस परियोजना को राजनीतिक रूप से विवादित बनाए रखने की कोशिश है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की राजनीतिक खींचतान का सीधा असर राज्य के आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।