भूरा मुंजा जेडजा की मृत्युलोक के एक दशक बाद उनकी दूसरी पत्नी ने 13 संपत्तियों को वापस पाने के लिए कानूनी शिकायत दायर की। यह मामला पोर्टबंदर में भूमि‑जबरजस्ती और वैध विवाह के विवाद को उजागर करता है, जबकि कई अन्य मुकदमों का भी सिलसिला चल रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भूरा मुंजा जेडजा की दूसरी पत्नी ने 13 संपत्तियों के पुनः अधिग्रहण के लिए शिकायत दर्ज की
- हिरालबा जेडजा को गुजरात भूमि जाबर्जस्ती (प्रतिबंध) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया
- जिला लैंड ग्रैबिंग समिति ने संपत्ति दस्तावेज़ों की विस्तृत जाँच की और रिपोर्ट प्रस्तुत की
गुजरात के पोर्टबंदर में एक दशक‑पिछला विवाद फिर से सार्वजनिक चर्चा में आया है, जब भूरा मुंजा जेडजा की दूसरी पत्नी, हिरालबा जेडजा, पर 13 संपत्तियों के अनधिकृत कब्जे का आरोप लगा। जेडजा, जो 2016 में निधन हो गया, एक समय के मजबूत राजनेता और माणिक समुदाय के प्रभावशाली नेता थे, और उनका नाम अब एक जटिल भूमि‑जाबर्जस्ती केस के केन्द्र में है।
पृष्ठभूमि एवं राजनीतिक संदर्भ
भूरा मुंजा जेडजा 1995‑2002 तक रैनावाव‑कुटियाना (बाद में कुटियाना) निर्वाचन क्षेत्र के लिए विधायक रह चुके थे। उनके परिवार में कई विवादात्मक व्यक्तित्व शामिल हैं, जिनमें उनके भाई सरमन मुंजा जेडजा, जिन्होंने 1990‑के दशक में माणिक समुदाय में शक्ति का विस्तार किया, तथा सैंटोकबेन की बहन‑ससुर की भूमिका भी शामिल है। जेडजा का शुरुआती जीवन यूके में बिताया गया, जहाँ उन्होंने अपनी पहली पत्नी राजीबेन और दूसरी पत्नी चौलादेवी के साथ दोहरी जीवनशैली अपनाई।
हिरालबा जेडजा पर कानूनी कार्रवाई
जूनागढ़ जेल में हिरालबा जेडजा को पोर्टबंदर के कमलाबौग पुलिस स्टेशन में गुजरात भूमि जाबर्जस्ती (प्रतिबंध) अधिनियम के तहत बुक किया गया। उनके खिलाफ गुजरात और हरियाणा में कुल सात अन्य मामले दर्ज हैं। पुलिस ने यह पुष्टि की कि 2013 में भूरा मुंजा जेडजा ने सार्वजनिक नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनका हिरालबा जेडजा से कोई वैध संबंध नहीं है। यह नोटिस, जो 20 सितंबर 2013 को स्थानीय समाचारपत्र में प्रकाशित हुआ, अदालत के दस्तावेज़ीकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य बना।
चौलादेवी की 13 संपत्तियों की पुनः दावा
जुलाई 2025 में चौलादेवी ने पोर्टबंदर कलेक्टरेट में आवेदन किया, जिसमें उन्होंने कहा कि हिरालबा जेडजा ने उनके नाम और उनके पुत्र भारत के नाम पंजीकृत 13 संपत्तियों को अवैध रूप से हथिया लिया है। इन संपत्तियों में 1,865 वर्ग मीटर का प्रसिद्ध “सूरज पैलेस” बंगलो शामिल है, जहाँ हिरालबा को पिछले वर्ष कई मामलों में गिरफ्तार किया गया था। उप-कलेक्टर एवं उप जिलाधिकारी (एसडीएम) संदीपसिंह जड़व ने मामले की जाँच की, दस्तावेज़ों की तुलना की और जमीन के लेन‑देनों की पूरी कागजी श्रृंखला स्थापित की।
कानूनी जटिलताएँ और वर्तमान स्थिति
गुजरात हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार, जिला लैंड ग्रैबिंग समिति को निर्णय लेने के बाद भी आरोपी को पुनः सुनवाई का अधिकार दिया जाता है। इस प्रक्रिया में कुटियाना के एसडीएम को हिरालबा जेडजा को अतिरिक्त सुनवाई का अवसर प्रदान करने का कार्य सौंपा गया। हालांकि, हिरालबा ने लगातार दावा किया कि ये 13 संपत्तियां “विवादित” हैं, जिससे मामला अब पुलिस के आपराधिक प्रक्रिया विभाग को भेजा गया है।
संभावित प्रभाव और भविष्य की दिशा
यदि चौलादेवी की मांगें न्यायालय में सफल रहती हैं, तो यह न केवल एक प्रमुख राजनेता के वारिसों के लिए संपत्ति पुनःस्थापन का precedent स्थापित करेगा, बल्कि गुजरात में भूमि‑जाबर्जस्ती मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी बढ़ावा देगा। दूसरी ओर, यदि हिरालबा जेडजा का दायित्व सिद्ध हो जाता है, तो यह राजनीतिक शक्ति संरचना में एक और बदलाव का संकेत देगा, जहाँ स्थानीय मजबूत व्यक्तियों की संपत्ति‑संबंधी विवादों को सख्त कानूनी निगरानी में लाया जा रहा है।