अमनदीप केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक हस्ताक्षर संग्रह अभियान शुरू किया, जिसमें आयोध्या राम मंदिर के दान चोरी के आरोपी पर फांसी की माँग की गई है। उन्होंने दिल्ली में खुला पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित किया और जनता से हनुमान चालीसा सुनाने की अपील की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आरएसएस ने आयोध्या दान चोरी के केस में फांसी की माँग की
  • केजरीवाल ने राष्ट्रीय हस्ताक्षर अभियान शुरू किया
  • बिजेपी ने अभियान को धर्म एवं वोट एकता को तोड़ने का आरोप लगाया

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (एएपी) के राष्ट्रीय संयोजक अमनदीप केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली के रोहिणी में एक बड़े मंच पर आयोध्या राम मंदिर के दान चोरी के आरोपियों पर फांसी की मांग करने के लिए राष्ट्रीय हस्ताक्षर अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक खुला पत्र पर पहला हस्ताक्षर किया।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक माहौल

आयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाए गए दान की चोरी का मामला पिछले साल सामने आया, जब कई बड़े दानदाता और संस्थाओं ने बताया कि उनके योगदान का सही उपयोग नहीं हुआ। इस मुद्दे को लेकर भाजपा और एएपी के बीच तीव्र शब्द युद्ध चल रहा है। केजरीवाल ने इस मुद्दे को अपनी पार्टी के धार्मिक और नैतिक एजेंडा का केंद्र बनाते हुए, जनता को “हिंदू धर्म के सम्मान” की रक्षा के लिए हनुमान चालीसा के पाठ और हस्ताक्षर संग्रह की अपील की।

हस्ताक्षर अभियान का विस्तार

केजरीवाल ने ट्विटर (X) पर लिखा कि “भगवान राम के भक्तों को आज गहरा दुख है और हम इस दुष्कर्म को सजा दिलाने के लिए थकेंगे नहीं।” उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत देश भर में हर शहर में स्वयंसेवक हनुमान चालीसा के पाठ आयोजित करेंगे और लोगों से पत्र पर हस्ताक्षर करवाएंगे। लक्ष्य 10 लाख से अधिक हस्ताक्षर जुटाना है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर दांव पर लगे दान की सुरक्षा और फांस की माँग को मजबूती मिले।

बिजेपी की प्रतिक्रिया

दिल्ली के भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण कपूर ने इस अभियान को “राम मंदिर और सनातन धर्म को अपमानित करने” तथा “हिंदू वोटर ब्लॉक को विभाजित करने” के दोहरे उद्देश्य के रूप में लेबल किया। उन्होंने कहा कि एएपी का यह कदम सामाजिक एकता को तोड़ने और विरोधी दल की कमजोरियों का फायदा उठाने का एक रणनीतिक प्रयास है।

आगे की संभावनाएँ

यदि हस्ताक्षर अभियान सफल होता है, तो यह राजनीतिक तौर पर एएपी को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिला सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ धर्म-आधारित मुद्दे चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं। वहीं, यदि सरकार इस मांग को गंभीरता से नहीं लेती, तो यह एएपी और भाजपा के बीच वैधता और नैतिकता को लेकर और अधिक तीव्र बहस को जन्म दे सकता है। इस प्रकार, आयोध्या दान चोरी मामला अब केवल एक भ्रष्टाचार केस नहीं रह कर, भारतीय राजनीति में धर्म, न्याय और वोटर भावना के जटिल टकराव का प्रतीक बन गया है।