आइएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तेरंगाना सरकार पर 52% गरीबों के पास जन्म प्रमाणपत्र न होने और 42% को जाति‑निवास प्रमाणपत्रों की कमी को उजागर कर स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (PRC) जारी करने का आग्रह किया। यह कदम विशेष तीव्र समीक्षा (SIR) के दौरान मतदान सूची में बहिष्कार को रोकने के लिए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 52% गरीबों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है
- 42% को जाति और निवास प्रमाणपत्र दोनों नहीं
- ओवैसी ने तेरंगाना में PRC जारी करने की तात्कालिक मांग की
असदुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मजलिस‑ए‑इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद, ने तेरंगाना सरकार पर गरीबों और पिछड़े वर्गों के लिए स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (PRC) या पारिवारिक रजिस्टर प्रमाणपत्र जारी करने का दबाव बढ़ा दिया है। यह मांग विशेष तीव्र समीक्षा (SIR) के तहत निर्वाचन सूची में नामांकन सुनिश्चित करने हेतु की गई है।
दस्तावेज़ीकरण की गंभीर कमी
ओवैसी ने पाँच राज्यों के सर्वेक्षण डेटा का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 52% गरीब वर्ग के लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, जबकि 42% को जाति‑निवास प्रमाणपत्र दोनो ही नहीं मिलते। इस के विपरीत, आर्थिक रूप से सुदृढ़ परिवारों के 82.3% बच्चों के पास जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध है। ऐसे आँकड़े यह दर्शाते हैं कि दस्तावेज़ीकरण की कमी से कई नागरिक अंतिम मतदान सूची से बाहर रह सकते हैं।
तेरंगाना सरकार के साथ बैठक
शुक्रवार को ओवैसी ने तेरंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू के साथ, साथ ही तेरंगाना अल्पसंख्यक आवासीय शैक्षिक संस्थान सोसायटी (TMREIS) के अध्यक्ष फैहिम क़ुरैशी के साथ मुलाकात की। उन्होंने अनुच्छेद 162 के तहत कांग्रेस सरकार को PRC जारी करने की शक्ति का प्रयोग करने का आग्रह किया, विशेषकर गरीब, अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए। ओवैसी ने कहा कि राज्य के पास समग्र कुटुंब सर्वे, 2024‑25 की सामाजिक‑आर्थिक एवं जाति सर्वे, बीएचयू भारतीय अधिनियम 2025 के रिकॉर्ड, खाद्य सुरक्षा कार्ड, नगरपालिका कर रिकॉर्ड और स्कूल दस्तावेज़ जैसी विश्वसनीय डेटाबेस मौजूद हैं, जिन्हें PRC जारी करने में उपयोग किया जा सकता है।
कर्नाटक मॉडल से प्रेरणा
ओवैसी ने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा 2011 के कर्नाटक सकाला सर्विसेज एक्ट के तहत जारी किए गए PRC का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “यदि कर्नाटक कर सकता है, तो तेरंगाना क्यों नहीं?” इस तुलना ने राज्य सरकार पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ा दिया है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की दिशा
विशेष तीव्र समीक्षा की प्रक्रिया जारी है, और दस्तावेज़ीकरण की कमी के कारण हजारों संभावित मतदाता बहिष्कृत हो सकते हैं। ओवैसी की यह पहल न केवल सामाजिक न्याय की मांग को उजागर करती है, बल्कि आगामी चुनावी संघर्ष में AIMIM को एक मजबूत वकील के रूप में स्थापित करने का रणनीतिक कदम भी है। विपक्षी दलों से भी समान दस्तावेज़ों जैसे PAN कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा कार्ड को वैध मानने की अपील की गई है।