चेन्नई में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, TNCC अध्यक्ष माणिकम टैगोर ने नीट परीक्षा के कुप्रबंधन और छात्रों की आत्महत्याओं को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और डीएमके सरकार पर तीखा हमला बोला।

मुख्य बातें

  • TNCC अध्यक्ष माणिकम टैगोर ने नीट परीक्षा में पेपर लीक और कुप्रबंधन के लिए केंद्र सरकार को घेरा।
  • टैगोर ने डीएमके पर चुप्पी साधे रहने और केवल सीपीआई(एम) द्वारा पीड़ित परिवारों की मदद करने का आरोप लगाया।
  • प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

चेन्नई के टी. नगर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष माणिकम टैगोर ने नीट (NEET) परीक्षा के कथित पेपर लीक और उसके परिणामस्वरूप छात्रों द्वारा की गई आत्महत्याओं के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस सभा में तमिलनाडु के विभिन्न राजनीतिक गठबंधन के नेता शामिल हुए, जिन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।

सभा को संबोधित करते हुए, टैगोर ने न केवल केंद्र सरकार पर हमला किया, बल्कि सत्ताधारी डीएमके (DMK) को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब नीट के कुप्रबंधन के कारण छात्रों ने आत्महत्या की, तो केवल सीपीआई(एम) ही एकमात्र ऐसा दल था जिसने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष के अन्य बड़े नेता इस संकट के समय कहां थे।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन केवल एक परीक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु में राजनीतिक शक्ति संतुलन को दर्शाता है। टैगोर का डीएमके पर निशाना साधना यह संकेत देता है कि कांग्रेस अब राज्य में क्षेत्रीय दलों की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है, विशेष रूप से सामाजिक न्याय और शिक्षा के मुद्दों पर।

"पीएम मोदी छात्रों के दर्द को नहीं समझ पा रहे हैं क्योंकि वे स्वयं शिक्षा की जटिलताओं से अनभिज्ञ हैं," टैगोर ने तीखा प्रहार करते हुए कहा।

टैगोर ने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, लेकिन विरोध होने पर पीछे हटने को मजबूर हो जाते हैं, जैसा कि कृषि कानूनों के मामले में देखा गया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नीट परीक्षा विवाद पिछले कुछ समय से भारत के शैक्षिक परिदृश्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। पेपर लीक के आरोपों ने न केवल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, बल्कि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु से लगभग 1,74,000 छात्र नीट की परीक्षा देते हैं, जिनमें से केवल एक छोटा हिस्सा ही प्रवेश पाने में सफल होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. माणिकम टैगोर ने डीएमके की आलोचना क्यों की?
टैगोर ने आरोप लगाया कि नीट संकट के दौरान डीएमके चुप रही, जबकि केवल सीपीआई(एम) ने प्रभावित परिवारों का साथ दिया।

2. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।