DMK सांसद दयानिधि मरान ने लोकसभा में NEET परीक्षा को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने 'एक भारत, एक परीक्षा' के विचार का विरोध करते हुए इसे छात्रों के लिए हानिकारक बताया।
मुख्य बातें
- DMK ने NEET परीक्षा को पूरी तरह खत्म करने की मांग की।
- सांसद दयानिधि मरान ने 'एक भारत, एक परीक्षा' के विचार का विरोध किया।
- तमिलनाडु में परीक्षा के दबाव के कारण छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठाया गया।
- कोचिंग सेंटरों को होने वाले लाभ और राज्य बोर्ड के छात्रों के नुकसान पर चिंता जताई गई।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को समाप्त करने की अपनी मांग को फिर से दोहराया। संसद के मानसून सत्र के दौरान, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा करते हुए, DMK सांसद दयानिधि मरान ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार का ध्यान केवल पेपर लीक रोकने पर है, जबकि परीक्षा की मूल संरचना ही समस्याग्रस्त है।
मरान ने कड़े शब्दों में कहा, "अब बहुत हो गया, NEET पर प्रतिबंध लगाओ, NEET को खत्म करो। 'एक भारत, एक परीक्षा' की नीति न अपनाएं। हमारी शक्ति हमारी विविधता में है।" उन्होंने एक दुखद आंकड़ा साझा करते हुए दावा किया कि इस परीक्षा के दबाव के कारण तमिलनाडु में अब तक 26 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल एक परीक्षा का नहीं बल्कि संघीय ढांचे और शिक्षा के अधिकार का है। मरान ने बताया कि हर साल लगभग 22 लाख छात्र NEET में बैठते हैं, लेकिन स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या केवल 1.39 लाख के आसपास है। यह भारी असंतुलन छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव पैदा करता है।
"NEET ने चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय केवल कोचिंग संस्थानों के लिए एक व्यापारिक मॉडल तैयार कर दिया है।"
इसके अलावा, मरान ने प्रश्न उठाया कि क्या NEET ने वास्तव में डॉक्टरों की गुणवत्ता में सुधार किया है या ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है? उन्होंने 2024 और 2026 की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में NEET का विरोध दशकों से चल रहा है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए असमान अवसर पैदा करती है, क्योंकि वे महंगे कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा सकते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. DMK का मुख्य विरोध क्या है?
DMK का तर्क है कि NEET राज्य बोर्ड के छात्रों और पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों के साथ भेदभाव करता है।
2. विपक्षी दलों ने क्या मांग की है?
NCP सांसद सुप्रिया सुले ने इस मुद्दे पर सभी दलों की बैठक और एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के गठन की मांग की है।