हैदराबाद कर्नाटक होरा समिति ने अनुच्छेद 371(J) के तहत मिलने वाले लाभों के सीमित क्रियान्वयन पर चिंता व्यक्त करते हुए कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए अलग बजट और विशेष विकास की मांग की है।
मुख्य बातें
- अनुच्छेद 371(J) लागू होने के 13 साल बाद भी लक्ष्य हासिल नहीं हुए।
- समिति ने शिक्षा और रोजगार के अलावा कृषि, उद्योग और संस्कृति में लाभों के विस्तार की मांग की।
- कल्याण कर्नाटक के लिए अलग मंत्रालय और अलग बजट बनाने का प्रस्ताव।
- फर्जी निवास प्रमाण पत्रों के जरिए लाभों के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई की मांग।
कलबुरागी: हैदराबाद कर्नाटक होरा समिति ने बुधवार को एक बड़े सम्मेलन में संविधान के अनुच्छेद 371(J) के प्रभावी कार्यान्वयन की अपनी मांग को फिर से बुलंद किया। वक्ताओं ने तर्क दिया कि इस विशेष संवैधानिक प्रावधान के लागू होने के 13 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह अपने वास्तविक उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है।
दिवंगत मंत्री वैजनाथ पाटिल की जयंती के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में, वक्ताओं ने कहा कि अनुच्छेद 371(J) के लाभ केवल शिक्षा और सरकारी नौकरियों तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए। समिति की मांग है कि इसका लाभ कृषि, सिंचाई, उद्योग, संस्कृति और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के समग्र विकास तक विस्तारित किया जाना चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए केवल संवैधानिक प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और पारदर्शी बजट आवंटन की आवश्यकता है। यदि इस क्षेत्र का औद्योगिक और कृषि विकास नहीं होता है, तो सामाजिक-आर्थिक अंतर बढ़ता ही जाएगा।
अनुच्छेद 371(J) केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि कल्याण कर्नाटक के सामाजिक न्याय का आधार है, जिसे अब पूर्णतः लागू करने की आवश्यकता है।
लेखक और समिति के सदस्य अल्लामप्रभु बेटदुर ने क्षेत्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत, जैसे कि 'कविराजमार्ग' और 'बसवा कल्याणी' के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने मांग की कि राज्योत्सव पुरस्कारों और मैसूर दशहरा जैसे कार्यक्रमों में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। वहीं, केकेसीसीआई (KKCCI) के पूर्व अध्यक्ष उमाकांत निग्गुदागी ने आरोप लगाया कि लक्षित लाभों का केवल 15 से 20 प्रतिशत ही जनता तक पहुँच पाया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 371(J) को हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विशेष प्रावधानों के रूप में पेश किया गया था। यह आंदोलन दशकों तक चला और अंततः संवैधानिक संशोधन के रूप में सफल हुआ, लेकिन इसके कार्यान्वयन में प्रशासनिक ढिलाई एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अनुच्छेद 371(J) क्या है?
यह संविधान का एक विशेष प्रावधान है जो कर्नाटक के हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के विकास के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण और अन्य सुविधाएं प्रदान करता है।
2. समिति की मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में अलग मंत्रालय, अलग बजट, सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना और रायचूर में एम्स (AIIMS) की स्थापना शामिल है।