तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार के नए कृषि बजट पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। किसान संगठनों का आरोप है कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए बहुत कम राशि आवंटित की गई है और चुनावी वादों को नजरअंदाज कर दिया गया है।
मुख्य बातें
- कृषि क्षेत्र के लिए कुल बजट का केवल 3.69% आवंटित किया गया है।
- सरकार द्वारा किए गए प्रमुख चुनावी वादे, जैसे धान की खरीद मूल्य में वृद्धि, अधूरे रहे।
- सिंचाई और बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी मुद्दों पर बजट में चुप्पी।
- किसान संगठनों ने सरकार पर किसानों की समस्याओं से मुंह मोड़ने का आरोप लगाया है।
तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार द्वारा प्रस्तुत हालिया कृषि बजट ने राज्य के किसान समुदाय के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। दक्षिणी जिलों किसान संघ (Southern Districts Farmers Association) ने कड़े शब्दों में कहा है कि यह बजट दर्शाता है कि सरकार ने किसानों की जिम्मेदारी से अपना हाथ खींच लिया है।
संघ के महासचिव एम. अर्जुनन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 8 करोड़ लोगों के लिए खाद्यान्न पैदा करने वाले किसानों की समस्याओं के प्रति सरकार के पास कोई सही समझ नहीं है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहाँ 2025-26 के बजट में कृषि के लिए ₹45,661 करोड़ की उम्मीद थी, वहीं वर्तमान बजट में केवल ₹14,984 करोड़ ही आवंटित किए गए हैं, जो कुल बजट का महज 3.69% है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि बजट में इतनी भारी कटौती न केवल खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में असंतोष भी पैदा कर सकती है। जब उत्पादन लक्ष्य 131 लाख मीट्रिक टन रखा गया है, तो संसाधनों में इतनी कमी भविष्य में संकट पैदा कर सकती है।
बजट में आवंटन की कमी और चुनावी वादों की अनदेखी सीधे तौर पर ग्रामीण वोट बैंक और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करेगी।
किसान नेताओं, विशेष रूप से एन.ए. रामचंद्र राजा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अपने प्रमुख चुनावी वादे पूरे नहीं किए हैं। इसमें धान की खरीद कीमत को ₹2,600 से बढ़ाकर ₹3,500 करने और सहकारी ऋण माफी जैसे महत्वपूर्ण वादे शामिल हैं। इसके अलावा, जंगली सूअरों के नियंत्रण और सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी सरकार मौन रही है।
बजट तुलना: पुराना बनाम नया
| विवरण | पिछला बजट (अनुमानित) | वर्तमान बजट (TVK) |
|---|---|---|
| कुल कृषि आवंटन | ₹45,661 करोड़ | ₹14,984 करोड़ |
| बजट का प्रतिशत | उच्च आवंटन | मात्र 3.69% |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. किसान संगठन बजट से क्यों नाराज हैं?
क्योंकि कृषि के लिए आवंटित राशि बहुत कम है और प्रमुख चुनावी वादे पूरे नहीं किए गए हैं।
2. बजट में किन मुख्य मुद्दों की अनदेखी की गई है?
सिंचाई परियोजनाओं, बिजली आपूर्ति, बांधों की गाद निकालने और फसलों के उचित मूल्य पर ध्यान नहीं दिया गया है।