केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने जनता से NICE रोड पर टोल न देने की अपील की है और सरकार को टोल संग्रह रोकने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने BMIC प्रोजेक्ट को एक बड़ा घोटाला बताते हुए सरकार से इसे तुरंत अपने नियंत्रण में लेने की मांग की है।

मुख्य बातें

  • एचडी कुमारस्वामी ने जनता से NICE टोल न देने की अपील की है।
  • सरकार को टोल वसूली रोकने के लिए 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है।
  • कुमारस्वामी ने BMIC प्रोजेक्ट को राज्य का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया है।
  • JD(S) ने कार्रवाई न होने पर तीव्र विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बड़ा बयान देते हुए जनता से NICE रोड पर टोल न चुकाने का आह्वान किया। उन्होंने राज्य सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगले दो सप्ताह के भीतर टोल संग्रह नहीं रोका गया, तो JD(S) बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेगी।

कुमारस्वामी ने मांग की कि सरकार को बेंगलुरु-मैसूरु इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) प्रोजेक्ट को तुरंत अपने नियंत्रण में लेना चाहिए। उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों का हवाला दिया जिनमें BMIC प्रोजेक्ट को राज्य के "सबसे बड़े घोटालों में से एक" के रूप में देखा गया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने इस मामले में धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष टीम और फोरेंसिक ऑडिट की आवश्यकता पर भी बल दिया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा न केवल राजनीतिक है बल्कि सीधे तौर पर बेंगलुरु के लाखों यात्रियों की जेब से जुड़ा है। यदि सरकार इस निजी प्रोजेक्ट के प्रबंधन में विफल रहती है, तो यह सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निजीकरण और उससे होने वाले संभावित भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल खड़े करता है।

"सरकार को NICE द्वारा की जा रही अनियमितताओं पर उच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर तुरंत जागना चाहिए; टोल अवैध रूप से वसूला जा रहा है," कुमारस्वामी ने कहा।

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि NICE ने फ्रेमवर्क समझौते का उल्लंघन किया है और नियमों को ताक पर रख दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि शक्तिशाली हितों ने NICE प्रोजेक्ट के नाम पर किसानों की जमीन हड़प ली है। उन्होंने किसानों को बेदखल करने और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सिस्टम को गुमराह करने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

NICE रोड (बेंगलुरु-मैसूरु इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर) लंबे समय से विवादों में रहा है। निजी कंपनी द्वारा संचालित इस प्रोजेक्ट पर अक्सर अत्यधिक टोल दरों और भूमि अधिग्रहण में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों और यात्रियों के बीच भारी असंतोष बना रहता है।

क्या आप जानते हैं?: NICE रोड प्रोजेक्ट को लेकर अदालत में 150 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कुमारस्वामी ने सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया है?
उन्होंने सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है कि वह NICE टोल संग्रह को तुरंत बंद करे और प्रोजेक्ट अपने हाथ में ले।

2. उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कहा है?
उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि यह प्रोजेक्ट एक बड़ा घोटाला प्रतीत होता है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।