कोलकाता की प्रतिष्ठित एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में एक सुरक्षा कक्ष के रंग को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। कलाकारों ने इसे सफेद किया, तो भाजपा ने फिर से केसरिया रंग कर दिया।

मुख्य बातें

  • एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स के एक सुरक्षा कक्ष का रंग बदलने को लेकर राजनीतिक संघर्ष।
  • कलाकारों और वामपंथी नेताओं ने इसे सफेद किया, जबकि भाजपा ने इसे फिर से केसरिया कर दिया।
  • पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी इमारतों के रंगों में बदलाव की प्रवृत्ति बढ़ी है।

कोलकाता की प्रतिष्ठित एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में चल रहा रंग का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने एक सुरक्षा कक्ष के रंग को सफेद से बदलकर फिर से केसरिया कर दिया है, जिससे शहर में नया राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब थिएटर कलाकारों ने पिछले महीने एकेडमी के एक हिस्से को केसरिया रंग दिए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके जवाब में, कलाकारों और वरिष्ठ अधिवक्ता एवं माकपा नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने मंगलवार (11 अगस्त, 2026) को उस हिस्से को सफेद रंग से रंग दिया। हालांकि, बुधवार (12 अगस्त, 2026) को भाजपा विधायक और अभिनेता रुद्रनिल घोष के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधियों ने परिसर में पहुंचकर इसे फिर से केसरिया रंग दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल रंग बदलने का मामला नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक प्रभुत्व की लड़ाई है। मई में पश्चिम बंगाल में भाजपा की सत्ता आने के बाद से, कई सरकारी भवनों, सड़कों और नागरिक संरचनाओं के रंगों में बदलाव देखा जा रहा है। नबन्ना (राज्य सचिवालय) के कुछ हिस्सों और सड़क बैरिकेड्स को भी नीले-सफेद से बदलकर केसरिया-सफेद किया जा रहा है।

रंगों का यह राजनीतिक उपयोग बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक स्वतंत्रता के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रतीक है।

एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की स्थापना 1933 में लेडी रानू मुखर्जी द्वारा की गई थी। यह संस्थान रबींद्रनाथ टैगोर, अबनिंद्रनाथ टैगोर और जामिनी रॉय जैसे महान कलाकारों की अमूल्य कृतियों का घर है। कलाकारों का कहना है कि यह कार्रवाई बंगाल की संस्कृति पर एक हमला है। वहीं, भाजपा नेता रुद्रनिल घोष का तर्क है कि कम्युनिस्टों ने ट्रस्टियों से बिना सलाह किए रंग बदला था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स को 1933 में स्थापित किया गया था। शुरुआत में यह इंडियन म्यूजियम के एक कमरे में संचालित होती थी, लेकिन बाद में इसे कैथेड्रल रोड पर वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। यह संस्थान कला जगत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है।

क्या आप जानते हैं?: एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रबींद्रनाथ टैगोर और जामिनी रॉय जैसे दिग्गजों की दुर्लभ कलाकृतियों का विशाल संग्रह मौजूद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: विवाद एकेडमी के एक सुरक्षा कक्ष के रंग को लेकर है, जिसे एक पक्ष ने सफेद और दूसरा केसरिया करना चाहता है।

प्रश्न 2: कलाकारों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: कलाकारों ने इसे सांस्कृतिक पहचान पर हमला और प्रभुत्व जमाने की कोशिश बताया है।