SIT की जांच में APPSC ग्रुप-I मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में गंभीर नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों का पता चला है। डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षक पैनल के चयन में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं।
मुख्य बातें
- SIT ने APPSC ग्रुप-I मुख्य परीक्षा मूल्यांकन में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की है।
- डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में चेयरमैन की मंजूरी के बिना भारी बदलाव किए गए।
- परीक्षक पैनल का चयन नियमों के विरुद्ध किया गया और डेटा लीक के मामले भी सामने आए हैं।
आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) के ग्रुप-I मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की गई जांच में पाया गया है कि डिजिटल और मैनुअल दोनों तरह के मूल्यांकन प्रक्रियाओं में आयोग के अपने नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।
जांच में क्या मिला?
DGP (CID) रवि शंकर अय्यनार के नेतृत्व वाली SIT की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लागू करने के निर्णय से लेकर परीक्षक पैनल के अनुमोदन तक, हर स्तर पर महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक विचलन देखे गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए APPSC चेयरमैन की कोई औपचारिक मंजूरी नहीं ली गई थी।
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की अखंडता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अनधिकृत संचार चैनलों के माध्यम से डेटा का आदान-प्रदान और अंकों में विसंगतियां यह संकेत देती हैं कि प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप की प्रबल संभावना थी।
जांच रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि मूल्यांकन प्रक्रिया की गोपनीयता भंग हुई, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हुआ।
SIT ने यह भी पाया कि कई मामलों में, अनिवार्य दूसरे मूल्यांकन (second evaluation) के लिए एक स्वतंत्र परीक्षक के बजाय एक ही फ्रीलांसर का उपयोग किया गया। इसके अलावा, परीक्षकों के गोपनीय विवरण मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही लीक हो गए थे, जो एक गंभीर सुरक्षा चूक है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह मामला 2018 की अधिसूचना से जुड़ा है, जिसकी मुख्य परीक्षा दिसंबर 2020 में आयोजित की गई थी। अप्रैल 2021 में परिणाम घोषित किए गए थे, लेकिन आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में इस प्रक्रिया को चुनौती दी गई, जिसके बाद न्यायालय ने डिजिटल मूल्यांकन को रद्द कर मैनुअल मूल्यांकन का आदेश दिया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. SIT की जांच का मुख्य निष्कर्ष क्या है?
SIT ने पाया कि APPSC ने नियमों को ताक पर रखकर डिजिटल मूल्यांकन किया और बिना उचित सत्यापन के परीक्षकों का पैनल बनाया।
2. उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
उच्च न्यायालय ने डिजिटल मूल्यांकन की वैधता को चुनौती मिलने पर इसे रद्द कर दिया था और पूरी प्रक्रिया के मैनुअल मूल्यांकन का निर्देश दिया था।