AIADMK नेता एडप्पाडी पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर किसानों की अनदेखी करने और सरकारी कार्यालय को आधुनिक बनाने में व्यस्त रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने कृषि ऋण माफी और कावेरी जल विवाद पर सरकार को घेरा है।

मुख्य बातें

  • एडप्पाडी पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर किसानों की समस्याओं के बजाय विलासिता पर ध्यान देने का आरोप लगाया।
  • AIADMK ने कृषि ऋणों की पूर्ण माफी और कावेरी नदी के पानी के वितरण की मांग की।
  • तंजौर में विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार को 'पोयक्कल कुदिरई सरकार' (झूठा घोड़ा सरकार) कहा गया।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK के महासचिव एडप्पाडी पलानीस्वामी (EPS) ने तंजौर में एक विशाल विरोध प्रदर्शन के दौरान वर्तमान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला। पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि जहाँ एक ओर तंजौर डेल्टा के किसान सूखे और पानी की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री अपने कार्यालय को आधुनिक और भव्य बनाने में व्यस्त हैं।

पलानीस्वामी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि अन्ना, कलाइग्नार, एम.जी.आर., जयललिता और यहां तक कि उन्होंने स्वयं भी साधारण कार्यालयों का उपयोग किया और जनता के लिए काम किया। उन्होंने कटाक्ष किया, "वह एक अभिनेता हैं और अभिनेताओं की तरह ही दिखावा करना चाहते हैं। उन्हें कार्यालय की सजावट की चिंता है, जनता की नहीं।"

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह राजनीतिक टकराव तमिलनाडु के कृषि संकट और सत्ता के प्रदर्शन के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है। किसानों के लिए ऋण माफी और कावेरी जल संकट केवल चुनावी मुद्दे नहीं हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

"मुख्यमंत्री का ध्यान बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर है, जबकि राज्य का कृषि क्षेत्र अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है - यह एक गंभीर नीतिगत विफलता का संकेत है।"

पलानीस्वामी ने विशेष रूप से कावेरी जल विवाद पर सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार कर्नाटक से पानी के हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के बजाय केवल सोशल मीडिया 'रील्स' बनाने में समय बर्बाद कर रही है। उन्होंने मांग की कि सूखे से प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 25,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है। पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्णय सुनिश्चित किए थे। AIADMK का दावा है कि उनके शासनकाल में किसानों को अभूतपूर्व राहत और पानी की सुरक्षा मिली थी।

क्या आप जानते हैं?: तंजौर डेल्टा को 'दक्षिण भारत का चावल का कटोरा' कहा जाता है, जो पूरे राज्य की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एडप्पाडी पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री किसानों की समस्याओं के बजाय अपने कार्यालय को आधुनिक बनाने और विलासितापूर्ण जीवन जीने में व्यस्त हैं।

2. AIADMK की मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में किसानों के कृषि ऋणों की पूर्ण माफी, कावेरी जल का उचित वितरण और सूखे से हुए नुकसान के लिए मुआवजा शामिल है।